हिमाचल विधानसभा में राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित, सुक्खू ने पूर्व सरकार पर साधा निशाना भारत 16 घंटे पहले 3
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे विश्वविद्यालयों के कामकाज और वित्तीय प्रबंधन में सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के कर्ज संकट के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की वित्तीय नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

हिमाचल विधानसभा में विश्वविद्यालय विधेयक को मिली मंजूरी

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में हाल ही में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित किया गया है। इस विधायी बदलाव के जरिए प्रदेश में चल रहे 6 राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था, नई नियुक्तियों की प्रक्रिया, विभिन्न पदों के सृजन, कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन-भत्तों से संबंधित नियमों में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करना है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि अब इन शैक्षणिक संस्थानों के वित्तीय निर्णयों पर राज्य सरकार की निगरानी और कड़ाई बढ़ जाएगी। नई व्यवस्था के अंतर्गत, विश्वविद्यालयों की वित्त समिति में अब वित्त विभाग की भूमिका को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है। अब भर्ती, पद सृजन और वेतन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर पहले वित्त समिति विचार करेगी, जिससे व्यवस्था में स्पष्टता आएगी।

विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और नियंत्रण

संशोधन के तहत शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भर्ती हेतु चयन समितियों का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। इन समितियों को पूरी तरह से तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। इस कानून के मुताबिक कुलपति को विश्वविद्यालय का सर्वोच्च कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी माना गया है, जो पूरे कामकाज की निगरानी करेंगे। विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में कुलपति को तत्काल फैसले लेने का अधिकार दिया गया है, हालांकि बाद में सक्षम प्राधिकारी से इसकी औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

विधेयक में यह भी तय किया गया है कि कार्यकारी परिषद प्रशासनिक और संपत्ति संबंधी मामलों का प्रबंधन देखेगी। वहीं, वित्त समिति को बजट, लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट की गहन जांच के बाद बोर्ड को आवश्यक सलाह देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुलाधिपति का निर्णय होगा अंतिम

इस नई प्रणाली में यदि वित्त समिति और कार्यकारी परिषद के बीच किसी भी प्रकार का मतभेद उत्पन्न होता है, तो उस मामले को कुलाधिपति के समक्ष भेजा जाएगा। कुलाधिपति राज्य सरकार के साथ परामर्श करने के पश्चात जो भी निर्णय लेंगे, वह अंतिम और सर्वमान्य होगा। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बढ़ेगी।

जयराम ठाकुर पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप

राज्य पर बढ़ते कर्ज के भार को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार पर जोरदार हमला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्ज लेना सरकारों की मजबूरी हो सकती है, लेकिन मौजूदा सरकार को पिछले शासन के दौरान लिए गए भारी-भरकम कर्ज की किस्तें चुकाने का दोहरा बोझ उठाना पड़ रहा है। सुक्खू ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जयराम ठाकुर एक अच्छे मुख्यमंत्री रहे होंगे, लेकिन एक वित्त मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल निराशाजनक रहा है।

कर्ज का गणित और आर्थिक स्थिति

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश की कर्ज लेने की सीमा 9,000 करोड़ रुपये निर्धारित है, जबकि हर साल हमें करीब 11,000 करोड़ रुपये कर्ज की किस्त चुकाने में खर्च करने पड़ रहे हैं। इस अंतर को भरने के लिए राज्य सरकार को अपने खजाने से 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश की संपदा का गलत इस्तेमाल किया और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कोई ठोस सुधार नहीं किए। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रदेश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

लॉटरी और भांग की खेती पर स्थिति स्पष्ट

मुख्यमंत्री ने लॉटरी के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने किसी भी नागरिक पर लॉटरी खरीदने का कोई दबाव नहीं डाला है, यह पूरी तरह से एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। भांग की खेती के संबंध में पूछे गए सवाल पर सुक्खू ने कहा कि भाजपा जानबूझकर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इस विषय पर बनी सेलेक्ट कमेटी में भाजपा के अपने विधायक भी शामिल हैं, इसलिए इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने बी.बी.एम.बी (BBMB) परियोजना में हिमाचल के हक की बात दोहराते हुए कहा कि प्रदेश सरकार अपने अधिकारों के लिए पहले भी लड़ी है और भविष्य में भी मजबूती से अपना पक्ष रखती रहेगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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