कनॉट प्लेस में सीजेपी के तिरंगा मार्च पर भड़के व्यापारी, कहा- 'विरोध का अधिकार आपका तो हमें भी है रोजी-रोटी का हक' दिल्ली 4 घंटे पहले 8
दिल्ली के कनॉट प्लेस में सीजेपी के लहरा दो तिरंगा मार्च और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से त्रस्त स्थानीय कारोबारियों ने प्रदर्शन किया है, उनका कहना है कि त्यौहारी सीजन में धंधा ठप होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कनॉट प्लेस सुरक्षा छावनी में तब्दील, ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

राजधानी दिल्ली का प्रमुख व्यापारिक केंद्र कनॉट प्लेस शुक्रवार को एक सुरक्षा छावनी के रूप में तब्दील नजर आया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में आयोजित 'लहरा दो तिरंगा मार्च' को लेकर इनर सर्कल में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे इलाके में जगह-जगह लोहे की बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

सुप्रीम कोर्ट से अभिजीत दिपके और सीजेपी को राहत मिलने के बाद प्रशासनिक चौकसी और बढ़ा दी गई। मार्च के कारण शहर में यातायात व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 21 प्रमुख रास्तों पर यातायात प्रभावित रहने और रूट डायवर्जन को लेकर औपचारिक ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की। हालांकि, इस प्रशासनिक घेराबंदी और प्रदर्शन के ऐलान ने कनॉट प्लेस के स्थानीय दुकानदारों एवं कारोबारियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे कारोबारी, अदालत से मिली नसीहत

व्यापारियों के भारी नुकसान को देखते हुए न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन की ओर से सीजेपी के इस कार्यक्रम को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। अदालत में व्यापारियों का पक्ष रखते हुए वकील जय अनंत देहादराय ने दलील दी कि बार-बार होने वाले धरनों और रैलियों के चलते व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इस प्रदर्शन से उन्हें भारी वित्तीय चपत लगेगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर दुकानदारों को राहत देने से मना कर दिया और कोई भी सीधा निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने सीजेपी को केवल यह सलाह दी कि वे समझदारी से काम लें ताकि आम जनता और राहगीरों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े। अदालत के इस फैसले के बाद कारोबारियों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।

'त्यौहारी सीजन में धंधा ठप, बच्चों को भूखा मार दें क्या?'

अदालत से राहत न मिलने के बाद कनॉट प्लेस के व्यवसायियों ने सड़कों पर उतरकर सीजेपी और अभिजीत दिपके के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। कारोबारियों का कहना है कि अगर सीजेपी को अपनी राजनीति और विरोध प्रदर्शन करने की आजादी है, तो उन्हें भी अपनी रोजी-रोटी कमाने का बराबर अधिकार है। पूरे साल व्यापारी त्यौहारों के इस सीजन की आस लगाए बैठे रहते हैं, लेकिन महीनों से जारी ऐसे आयोजनों ने उनका काम पूरी तरह ठप कर दिया है। डर और सुरक्षा जांच के चक्कर में आम ग्राहकों ने सीपी की तरफ आना ही बंद कर दिया है।

व्यापारियों ने खुलकर बयां की अपनी पीड़ा

विरोध दर्ज करा रहे कनॉट प्लेस के अलग-अलग दुकानदारों ने अपनी समस्याओं को साझा किया:

  • विक्रम सिंह (कारोबारी): "अगर इन लोगों को प्रोटेस्ट करने का हक मिला हुआ है, तो हमें भी अपनी रोटी कमाने का पूरा अधिकार है। पिछले कुछ दिनों से हमारा काम पूरी तरह बंद पड़ा है, जबकि यही वह त्यौहारी सीजन है जिसका इंतजार हर व्यापारी साल भर करता है।"
  • अमित गुप्ता (व्यवसायी): "हर बार किसी भी गतिविधि के लिए कनॉट प्लेस को ही क्यों चुना जाता है? राहगीरी का आयोजन हो तो सीपी, किसी बड़े नेता को लंच करना हो तो सीपी और अब तिरंगा यात्रा निकालनी है तो भी सीपी। यह कोई धरना स्थल नहीं है, मेहरबानी करके हमें शांति से काम करने दीजिए।"
  • गौरवजीत कोचर (व्यापारी): "प्रशासन से यही प्रार्थना है कि सुरक्षा का घेरा थोड़ा कम किया जाए। हम जानते हैं कि सुरक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन जब आने-जाने वाले ग्राहक लगातार ऐसी घोषणाएं सुनेंगे तो वे खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगे?"
  • प्रेम शर्मा (दुकानदार): "अब तो हद ही हो गई है। सबसे कठिन और बुरे वक्त में भी हमने इस बाजार को कभी बंद नहीं होने दिया था। आज हालत यह हो चुकी है कि ग्राहक फोन करके पूछते हैं कि सीपी खुला है या बंद। आपको जितना विरोध करना है करिए, लेकिन जो जगह प्रदर्शन के लिए तय की गई है, वहीं जाकर कीजिए।"
  • तरुण अग्रवाल (कारोबारी): "ग्राहकों ने कनॉट प्लेस की तरफ आना ही छोड़ दिया है। स्थिति यह है कि शहर में कहीं और पहुंचने में आधा घंटा लगता है, तो सीपी पहुंचने में दो घंटे लग रहे हैं। इसके बाद भी यह गारंटी नहीं होती कि इंसान वापस कब पहुंचेगा। त्यौहार के समय में हम कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन हमारा बहुत बुरा हाल हो चुका है।"

आजीविका पर गहराया संकट

कनॉट प्लेस के व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि राजनीतिक रैलियों और अत्यधिक सुरक्षा पहरे की वजह से देश के इस ऐतिहासिक और प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र का माहौल पूरी तरह बिगड़ रहा है। त्यौहारों के इस मुख्य समय में बिक्री न होने से सैकड़ों दुकानों और उनसे जुड़े कर्मचारियों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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