उत्तर प्रदेश
3 महीने पहले
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गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक चुस्त बनाने के प्रयासों के बीच पुलिस विभाग के भीतर से एक बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने अनुशासनहीनता और अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए विभागीय दंड का आदेश दिया है। डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने एक दारोगा और दो हेड कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
ड्यूटी में लापरवाही पर गिरेगी गाज
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले काफी समय से इन पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच करवाई। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये तीनों पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी को लेकर बेहद लापरवाह थे और अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे थे। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत को प्रशासन ने कतई स्वीकार न करते हुए उन पर कार्रवाई का फैसला लिया। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जनसेवा और कर्तव्य पालन में किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मी जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात थे और वे अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पा रहे थे। जिन पुलिसकर्मियों पर यह कार्रवाई की गई है, उनका विवरण इस प्रकार है:
- सब-इंस्पेक्टर राजीव शर्मा: ये मोदीनगर में एसीपी कार्यालय में वाचक यानी रीडर के तौर पर कार्यरत थे।
- हेड-कांस्टेबल सुधीर: इनकी तैनाती गाजियाबाद के मसूरी थाने में थी।
- हेड-कांस्टेबल नईमुद्दीन: ये लोनी बॉर्डर थाने जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
अनुशासन के प्रति सख्त संदेश
डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश है। विभाग का स्पष्ट मानना है कि एक पुलिसकर्मी का प्राथमिक कर्तव्य जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करना है। यदि कोई पुलिसकर्मी, चाहे वह किसी भी पद पर तैनात हो, जनता के साथ अपने व्यवहार में ढिलाई बरतता है या अपने काम में लापरवाही दिखाता है, तो उसे ऐसी ही सख्त विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस कदम को पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जिले के अन्य थानों में भी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इसी तरह की निगरानी बनी रहेगी।
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