गणेश चतुर्थी 2026: घर ला रहे हैं बप्पा तो सूंड की दिशा पर जरूर दें ध्यान, जानें मूर्ति चुनने का सही नियम धर्म एक घंटा पहले 4
गणेश चतुर्थी के मौके पर घर में गणपति की मूर्ति स्थापित करने से पहले सूंड की सही दिशा और शुभता से जुड़े नियमों को जानना बेहद जरूरी है। ज्योतिषियों के अनुसार, बाईं और दाईं ओर मुड़ी सूंड का अलग-अलग महत्व होता है।

हिंदू धर्म में त्योहारों का अपना एक विशेष और गहरा महत्व है। इनमें से एक सबसे प्रमुख और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्योहार है गणेश चतुर्थी। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में यह पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल यानी 2026 में गणेश चतुर्थी का यह महापर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर श्रद्धालु अपने घरों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं और पूरी श्रद्धा भाव से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

उत्तराखंड के ऋषिकेश सहित देशभर में तैयारियां शुरू

त्योहार के आते ही उत्तराखंड के ऋषिकेश सहित देश के कोने-कोने में बप्पा के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। बाजारों में रौनक बढ़ गई है और विभिन्न आकारों, रंगों और सुंदर रूपों में गणपति बप्पा की मूर्तियां सज चुकी हैं। जब लोग अपने घर के लिए मूर्ति खरीदने बाजार जाते हैं, तो उनके मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। मूर्ति किस आकार की होनी चाहिए, भगवान की मुद्रा कैसी हो और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि बप्पा की सूंड किस दिशा में मुड़ी होनी चाहिए?

किस दिशा में होनी चाहिए बप्पा की सूंड?

सनातन परंपरा में भगवान गणेश को सुख, समृद्धि, बुद्धि और शुभता का प्रदाता माना गया है। यही कारण है कि घर में उनकी मूर्ति स्थापित करने से पहले लोग हर नियम का बारीकी से पालन करना चाहते हैं। लोकल 18 के साथ बातचीत में प्रसिद्ध ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है।

ज्योतिषी अखिलेश पांडेय के अनुसार, मूर्ति खरीदते समय सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर होती है कि गणपति की सूंड बाईं ओर मुड़ी है या दाईं ओर। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए मूर्ति के चयन के कुछ विशेष नियम होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है।

बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति क्यों मानी जाती है सर्वोत्तम?

धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, घर के मंदिर में स्थापित करने के लिए हमेशा बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति की मूर्ति को ही सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

  • सौम्य और शांत स्वरूप: बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को बेहद शांत, सरल और सौम्य स्वभाव का प्रतीक माना जाता है।
  • सरल पूजा विधि: ऐसी मान्यता है कि इस स्वरूप की पूजा-आराधना बेहद सामान्य और सरल तरीके से की जा सकती है। इसके लिए किसी बहुत कठिन या जटिल तांत्रिक अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती।
  • पारिवारिक सुख-शांति: घर के वातावरण को शांतिपूर्ण बनाए रखने और पारिवारिक कलह को दूर करने के लिए इस प्रतिमा की पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है।

यही वजह है कि जब भी लोग गणेश चतुर्थी पर अपने घरों के लिए बप्पा की मूर्ति का चयन करते हैं, तो वे बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले स्वरूप को ही प्राथमिकता देते हैं। इसलिए, यदि आप भी इस गणेश चतुर्थी पर अपने घर में सुख-समृद्धि का वास चाहते हैं, तो बप्पा की मूर्ति लाते समय उनकी सूंड की दिशा का विशेष ध्यान रखें और पूरी श्रद्धा के साथ उनका स्वागत करें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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