पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज का उपवास? तो इन खास नियमों का पालन करना न भूलें धर्म 3 घंटे पहले 3
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यदि आप इस साल पहली बार इस निर्जला व्रत को करने जा रही हैं, तो पूजा और उपवास से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां यहां विस्तार से पढ़ें।

हरतालिका तीज का महत्व और तिथि

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि जो महिलाएं पूर्ण निष्ठा और विधि-विधान के साथ इस व्रत को रखती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साल 2026 में यह शुभ तिथि 14 सितंबर को पड़ रही है। यदि आप पहली बार इस व्रत की शुरुआत करने वाली हैं, तो पूजा के नियमों और शुभ समय के बारे में पूरी जानकारी होना आवश्यक है।

हरतालिका तीज 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि का प्रारंभ 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर हो रहा है, जो 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दिन पूजा के लिए सुबह का शुभ समय 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 7 बजकर 6 मिनट तक निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दोपहर में अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026 को किया जाना है।

व्रत रखने के दौरान किन नियमों का रखें ध्यान

  • संकल्प लें: व्रत शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में व्रत का संकल्प लें। एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद इसे बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता।
  • मन की शांति: व्रत के दौरान अपने मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखें। बिना किसी कारण के क्रोध करने या विवादों में पड़ने से बचें।
  • रात्रि जागरण: हरतालिका तीज पर दिन में सोने की मनाही होती है। भक्तों को पूरी रात जागकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना चाहिए और जागरण करना चाहिए।
  • निर्जला उपवास: यह व्रत पूरी तरह से निर्जला होता है। सूर्योदय से लेकर अगले दिन के पारण तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है।
  • सोलह श्रृंगार: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना चाहिए। पूजा के समय लाल, पीला या हरे रंग के शुभ वस्त्र पहनना फलदायी होता है। इस दिन काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
  • मिट्टी की प्रतिमा: पूजा के लिए हाथों से बनी मिट्टी या रेत की भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा का उपयोग करना अनिवार्य माना जाता है।
  • पारण की विधि: व्रत के अगले दिन सुबह विधिवत पूजा करें और दान-दक्षिणा देने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें। इसके बाद ही जल ग्रहण करके अपना पारण करें।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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