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58 मिनट पहले
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भाद्रपद पूर्णिमा और पितृ पक्ष का महत्व
धार्मिक पंचांग के अनुसार 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल गंगा स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। सबसे विशेष बात यह है कि इसी दिन से पितृ पक्ष का आरंभ हो रहा है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान करते हैं। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस अवधि में पूरी श्रद्धा के साथ उनका स्मरण करना आवश्यक माना गया है।
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन क्या करें?
पूर्णिमा के दिन घर में सकारात्मकता और शांति बनाए रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए:
- पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर अपने घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह स्वच्छ कर लें। स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करना शुभ होता है।
- विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
- यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करें। इसके बाद ईश्वर के नाम का निरंतर जाप और ध्यान करें।
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें।
- घर का वातावरण पूर्ण रूप से शांत रखें। इस दिन किसी से भी किसी भी प्रकार का विवाद न करें।
- आहार में केवल सात्विक चीजों को ही शामिल करें।
इन गलतियों से बचें
कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें पूर्णिमा और पितृ पक्ष की शुरुआत के दौरान वर्जित माना गया है:
- पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली या नशीली वस्तुओं का सेवन बिल्कुल न करें।
- किसी भी व्यक्ति से कलह न करें और विशेष रूप से अपने से बड़े बुजुर्गों का निरादर न करें।
- चूंकि इसी दिन से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं, इसलिए बाल और दाढ़ी कटवाने जैसे कार्यों को पहले ही पूरा कर लें। इन दिनों में बाल या दाढ़ी कटवाना निषेध माना गया है।
- नाखून काटना भी इस दिन वर्जित है, इसलिए इन कार्यों से बचें।
पितृ पक्ष के दौरान पालन करने योग्य नियम
पितृ पक्ष की अवधि में पूर्वजों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए निम्नलिखित बातों का पालन करें:
- इस पूरे पखवाड़े में लहसुन, प्याज, मांस, अंडा, मछली और मदिरा का सेवन पूरी तरह से त्याग दें।
- इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक या शुभ कार्यों का आयोजन न करें।
- नई वस्तुओं की खरीदारी करने से बचें।
- यदि आपके घर के मुख्य द्वार पर कोई जरूरतमंद आए, तो उसे कभी खाली हाथ न लौटाएं।
- गाय, कुत्ता और कौए को भोजन कराएं। उन्हें परेशान करना अशुभ माना जाता है।
- अपने पितरों की तिथि पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल, गंगाजल और दूध मिलाकर तर्पण करें। यह अनुष्ठान हमेशा कुशा धारण करके ही करना चाहिए।
- भोजन तैयार होने के बाद, सबसे पहले पंचबलि यानी गाय, कौआ, कुत्ता, देव और चींटी के लिए हिस्सा निकालें।
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