नौकरी छोड़ खेतों में रचा सफलता का इतिहास, शिक्षक अशोक पाटिल अब कहलाते हैं समृद्ध किसान मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 40
बुरहानपुर के निंबोला गांव के अशोक पाटिल ने शिक्षक की सरकारी नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया और पिछले 15 सालों से मिक्स खेती कर हर साल तीन से चार लाख रुपये कमा रहे हैं तथा 10 से 15 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में अब लोग सरकारी नौकरियों को छोड़कर खेती-किसानी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक मिसाल जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे निंबोला गांव के किसान अशोक पाटिल ने पेश की है। उन्होंने शिक्षक की सरकारी नौकरी को अलविदा कहकर खेतों का रुख किया और बीते 15 सालों से लगातार खेती कर रहे हैं।

शुरुआत में अशोक पाटिल ने गन्ने की खेती की, लेकिन अब वे केले के साथ-साथ तरबूज की भी पैदावार लेते हैं। मिक्स खेती के इस तरीके से उन्हें हर साल तीन से चार लाख रुपये की आमदनी हो रही है। इतना ही नहीं, अपने खेतों में वे 10 से 15 लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।

नौकरी से खेती तक का सफर

लोकल 18 की टीम से बातचीत में अशोक पाटिल ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे शिक्षक की सरकारी नौकरी कर रहे थे, मगर वेतन इतना कम था कि परिवार चलाना मुश्किल हो जाता था। तीन साल तक नौकरी करने के बाद उन्होंने इसे छोड़कर खेती का रास्ता चुना।

सबसे पहले उन्होंने गन्ने की फसल लगाई, जिसमें पहली ही बार में भारी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन इसी अनुभव से उन्हें खेती का बेहतर तरीका समझ में आया और उन्होंने मिक्स खेती की शुरुआत की। आज वे 20 एकड़ जमीन पर गन्ना, केला और तरबूज उगाते हैं, जिससे हर साल तीन से चार लाख रुपये की कमाई हो जाती है।

मिक्स खेती से बढ़ी आमदनी

अशोक पाटिल का कहना है कि पहले वे सिर्फ एक ही फसल लगाते थे, लेकिन अब मिक्स खेती करते हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये की कमाई हो रही है। उन्होंने बताया कि वे अपने इलाके के एक समृद्ध किसान बन चुके हैं और उनके यहां उत्पादन भी अच्छा होता है।

अच्छे उत्पादन के चलते कमाई भी बेहतर हो जाती है और इसके साथ ही वे अपने क्षेत्र के 10 से 12 लोगों को बारह महीने रोजगार उपलब्ध कराते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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