हरियाणा
3 महीने पहले
112
विचारों
पौराणिक महत्व और इतिहास
फरीदाबाद की सुरम्य अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित परसोंन मंदिर श्रद्धा और इतिहास का एक अद्भुत केंद्र है। स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, यह स्थान महान ऋषि महर्षि पराशर की तपोस्थली रहा है और इसे महर्षि वेदव्यास का जन्मस्थान भी माना जाता है। इस क्षेत्र की ऐतिहासिक गहराई को समझने के लिए फरीदाबाद के डीएवी कॉलेज के इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर कमलेश ने विस्तार से जानकारी दी है।
हनुमान जी के पदचिह्न और पवित्र कुंड
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद हनुमान जी के पदचिह्न हैं, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। कहा जाता है कि हनुमान जी ने यहां विश्राम किया था, जिसके प्रमाण के तौर पर उनके पैरों के निशान आज भी वहां देखे जा सकते हैं। मंदिर परिसर के भीतर ही तीन अत्यंत पवित्र कुंड भी स्थित हैं। ऐसी मान्यता है कि महर्षि पराशर ने इन कुंडों का निर्माण किया था।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इन पवित्र कुंडों में स्नान करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। प्रोफेसर कमलेश के अनुसार, समय के साथ-साथ इस धार्मिक स्थल का महत्व लगातार बढ़ता गया है। यही कारण है कि यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है और दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुँचते हैं।
Comments
0 comment