फरीदाबाद: अरावली की पहाड़ियों में छिपा है पौराणिक परसोंन मंदिर, हनुमान जी के पदचिह्नों से जुड़ी है मान्यता हरियाणा 3 महीने पहले 112
फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों में बसा परसोंन मंदिर अपनी पौराणिक विरासतों और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इसे महर्षि पराशर की तपोभूमि और महर्षि वेदव्यास की जन्मस्थली के रूप में भी माना जाता है।

पौराणिक महत्व और इतिहास

फरीदाबाद की सुरम्य अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित परसोंन मंदिर श्रद्धा और इतिहास का एक अद्भुत केंद्र है। स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, यह स्थान महान ऋषि महर्षि पराशर की तपोस्थली रहा है और इसे महर्षि वेदव्यास का जन्मस्थान भी माना जाता है। इस क्षेत्र की ऐतिहासिक गहराई को समझने के लिए फरीदाबाद के डीएवी कॉलेज के इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर कमलेश ने विस्तार से जानकारी दी है।

हनुमान जी के पदचिह्न और पवित्र कुंड

इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद हनुमान जी के पदचिह्न हैं, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। कहा जाता है कि हनुमान जी ने यहां विश्राम किया था, जिसके प्रमाण के तौर पर उनके पैरों के निशान आज भी वहां देखे जा सकते हैं। मंदिर परिसर के भीतर ही तीन अत्यंत पवित्र कुंड भी स्थित हैं। ऐसी मान्यता है कि महर्षि पराशर ने इन कुंडों का निर्माण किया था।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इन पवित्र कुंडों में स्नान करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। प्रोफेसर कमलेश के अनुसार, समय के साथ-साथ इस धार्मिक स्थल का महत्व लगातार बढ़ता गया है। यही कारण है कि यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है और दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुँचते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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