दीपू रुको... कहकर फोन काटने वाला युवक निकला धोखेबाज, अपहरण की कहानी के पीछे का सच सुन दंग रह गया परिवार दिल्ली एक घंटा पहले 4
दिल्ली के रोहिणी में एक व्यक्ति के कथित अपहरण का मामला तब उलझ गया जब पुलिस ने उसे गाजियाबाद से सुरक्षित ढूँढ निकाला, जहाँ पूछताछ में बेरोजगारी और कर्ज का एक बड़ा राज सामने आया।

दिल्ली में सनसनीखेज अपहरण का मामला

दिल्ली के रोहिणी इलाके से सामने आए एक चौका देने वाले मामले ने न केवल पुलिस बल्कि पूरे परिवार को हैरान कर दिया है। यहाँ एक 35 वर्षीय व्यक्ति के अचानक लापता होने और उसके बाद सामने आए अपहरण के संकेतों ने सभी को दहशत में डाल दिया था। पुलिस की गहन जांच के बाद जो हकीकत सामने आई, वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। यह घटना तब शुरू हुई जब उक्त व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया और उसके बाद आई एक फोन कॉल ने परिवार की रातों की नींद उड़ा दी थी।

फोन कॉल और रहस्यमयी घटनाक्रम

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह व्यक्ति 3 अगस्त को सुबह के समय हमेशा की तरह काम पर जाने का बहाना बनाकर घर से निकला था। रात के करीब 8:05 बजे उसने अपने पिता को फोन कर जानकारी दी कि वह जल्द ही घर वापस लौट आएगा। इसके कुछ समय बाद उसने अपने छोटे भाई को कॉल किया, लेकिन उस दौरान कॉल पर केवल दीपू... दीपू... रुको... जैसी घबराई हुई आवाज सुनाई दी और अचानक फोन कट गया। इसके तुरंत बाद ही उसका मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद हो गया। कुछ ही घंटों में जब रोहिणी सेक्टर-28 के समीप उसकी कार लावारिस हालत में पाई गई, तो परिवार को यकीन हो गया कि उसका अपहरण कर लिया गया है।

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

परिवार की शिकायत के बाद शाहबाद डेयरी थाने में अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले की तफ्तीश शुरू की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और अन्य आधुनिक साधनों का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति की लोकेशन को ट्रैक किया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम ने उसे गाजियाबाद के कौशांबी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बस स्टैंड के आसपास से सकुशल बरामद कर लिया। हालांकि, जब वह पुलिस के सामने आया, तो पूरी कहानी की परतें खुलनी शुरू हो गईं।

बेरोजगारी और कर्ज का दबाव

पूछताछ में उसने जो खुलासा किया, उससे हर कोई दंग रह गया। व्यक्ति ने स्वीकार किया कि वह पिछले करीब एक साल से बेरोजगार था। उसने अपने परिवार से यह कड़वा सच पूरी तरह छिपा रखा था और वह रोज घर से काम पर जाने का नाटक करता था। इस दौरान उसने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई वित्तीय कंपनियों से मोटी रकम का कर्ज भी ले लिया था। कर्ज की किश्तें समय पर न चुका पाने के कारण रिकवरी एजेंट या वसूली करने वाले लोग उस पर लगातार दबाव बना रहे थे।

झूठ का सहारा और अपहरण का ड्रामा

आर्थिक तंगी और सिर पर मंडरा रहे कर्ज के बोझ से घबराकर उसने रास्ता ढूंढने के बजाय अपराध का रास्ता चुना। उसने अपने ही अपहरण की पूरी साजिश रची ताकि वह कर्ज देने वालों और परिवार की नजरों से दूर हो सके। वह जानबूझकर घर छोड़कर अलग-अलग ठिकानों पर छिपता फिर रहा था ताकि कोई उसे ढूंढ न सके। पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए उसे बरामद किया और बाद में उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर मानसिक दबाव और बेरोजगारी से उपजी समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान खींचा है, जहाँ एक झूठ को छिपाने के चक्कर में व्यक्ति ने पूरे सिस्टम को ही हिलाकर रख दिया था।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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