भारतीय वायुसेना को मिली बड़ी ताकत, स्वदेशी AWACS 'नेत्रा' को मिला फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस भारत 4 महीने पहले 119
भारत की निगरानी प्रणाली 'नेत्रा' को अब पूरी तरह से आधिकारिक तौर पर वायुसेना में शामिल कर लिया गया है। यह स्वदेशी तकनीक से लैस विमान दुश्मन की हर हरकत पर आसमान से नजर रखने में सक्षम है।

आसमान में भारत की 'नेत्रा' हुई पूरी तरह तैयार

भारतीय वायुसेना की क्षमता में एक और बड़ा इजाफा हुआ है। भारत में विकसित निगरानी विमान 'नेत्रा' को अब फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस यानी FOC प्रदान कर दिया गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की लैब CABS में तैयार किए गए इस AWACS को अब पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार माना गया है। 'नेत्रा' पहले ही बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम अभियानों में अपनी उपयोगिता साबित कर चुकी है।

क्या है FOC का महत्व

बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उप वायु सेना प्रमुख अवधेश भारती ने FOC का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। FOC का अर्थ है कि विमान या किसी सैन्य प्रणाली ने अपने सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह किसी भी सैन्य उपकरण की क्षमता का वह अंतिम चरण है, जो इसे हर प्रकार के मिशन के लिए पूरी तरह सक्षम बनाता है। इससे पहले इसे प्रारंभिक मंजूरी यानी IOC दी गई थी।

नेत्रा की तकनीकी क्षमताएं

नेत्रा एक अत्याधुनिक Airborne Early Warning and Control (AEW&C) सिस्टम है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • यह लंबी दूरी से दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाने में माहिर है।
  • यह केवल निगरानी ही नहीं करता, बल्कि भारतीय लड़ाकू विमानों और ग्राउंड स्टेशनों को रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करता है।
  • युद्ध के दौरान सटीक और तुरंत फैसले लेने में यह वायुसेना के लिए गेम चेंजर साबित होता है।
  • ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर विमान के ढांचे पर बने इस सिस्टम को स्वदेशी सेंसर से लैस किया गया है।

क्यों कहा जाता है इसे भारत की 'आसमान में उड़ती आंख'

नेत्रा को 'आसमान में उड़ती आंख' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सैकड़ों किलोमीटर की हवाई सीमा की हर गतिविधि को भांप लेती है। यह नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली का एक अहम हिस्सा है, जो देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मदद करती है। विदेशी रडार तकनीक पर निर्भरता को कम करते हुए, यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है।

स्वदेशी तकनीक का दम

DRDO के महानिदेशक डॉ. बिनय कुमार दास ने इस उपलब्धि को वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी होने के कारण अब भारतीय वायुसेना के पास इसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड करने की पूरी आजादी होगी। इस सिस्टम की मौजूदगी से भारतीय हवाई क्षेत्र की निगरानी और अधिक मजबूत हो गई है, जिससे दुश्मन के हर मंसूबे को समय रहते नाकाम किया जा सकेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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