धौलपुर: लीला विहार कॉलोनी में सीवर का गंदा पानी बना मुसीबत, नरक जैसी स्थिति से जूझ रहे स्थानीय लोग राजस्थान एक महीने पहले 73
राजस्थान के धौलपुर शहर की लीला विहार कॉलोनी में पिछले कई महीनों से सीवर जाम होने के कारण सड़कों पर जलभराव और गंदगी का सैलाब है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और नगर परिषद को बार-बार सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे लोग गंभीर बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं।

लीला विहार कॉलोनी में बदहाल स्थिति

राजस्थान के धौलपुर शहर की ओड़ेला रोड पर स्थित लीला विहार कॉलोनी इस समय भीषण जलभराव और गंदगी की समस्या से जूझ रही है। पिछले कई महीनों से सीवर लाइन जाम होने की वजह से कॉलोनी की मुख्य सड़कों और तंग गलियों में गंदा और बदबूदार पानी भरा हुआ है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। बरसात का मौसम शुरू होने के बाद स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई है, जिससे कॉलोनी में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

घरों में कैद होने को मजबूर लोग

सीवर का ओवरफ्लो पानी इस कदर बढ़ गया है कि यह कई मकानों के मुख्य द्वारों तक पहुंच चुका है। निवासी अपने ही घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। इस प्रदूषित पानी से उठने वाली दुर्गंध ने लोगों का दम घोंटना शुरू कर दिया है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घरों की खिड़कियां और दरवाजे चौबीसों घंटे बंद रखने के बावजूद बदबू का असर अंदर तक महसूस किया जा सकता है। इसके अलावा, लगातार जलभराव के चलते मकानों की दीवारों और नींव में सीलन आ गई है, जिससे संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

बच्चों की सेहत और पढ़ाई पर गहरा असर

कॉलोनी निवासी महेश कुशवाहा ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि कई महीनों से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को रोज इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। पानी के बीच से निकलते समय बच्चों के बीमार होने और उनके कपड़ों व जूतों में गंदगी लगने का डर बना रहता है। महेश कुशवाहा के अनुसार, इस गंदगी के कारण इलाके में महामारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ गया है। बदबू और संक्रमण के डर से बच्चे बाहर खेलने तक नहीं जा पा रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ रहा है।

रसोई तक पहुंचा सीवर का पानी

एक अन्य स्थानीय निवासी हरिओम कुशवाहा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि बरसात के दिनों में सीवर का बैकफ्लो पानी सीधे घरों के भीतर प्रवेश कर जाता है। उन्होंने कहा कि पानी अक्सर रसोई और रहने वाले कमरों तक पहुंच जाता है, जिससे पूरी गृहस्थी अस्त व्यस्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में घर से बाहर निकलना तो दूर, घर के अंदर सुरक्षित बैठना भी मुश्किल हो गया है। दूषित वातावरण के कारण स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से पांव पसार रही हैं।

नगर परिषद की निष्क्रियता पर गुस्सा

कॉलोनी की निवासी छोटी देवी ने इस स्थिति के लिए नगर परिषद प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बारे में जिला कलेक्टर और नगर परिषद कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन हर बार अधिकारियों ने सिर्फ कोरे आश्वासन ही दिए हैं। धरातल पर किसी भी प्रकार का काम नहीं हुआ है, जिसके कारण लोगों में भारी आक्रोश है। ममता देवी ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि सड़क पर जमे पानी में छिपे गड्ढे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। पानी में काई जम जाने के कारण बुजुर्गों और महिलाओं के फिसलकर चोटिल होने का डर हर पल बना रहता है।

त्वचा संबंधी रोगों का खतरा बढ़ा

इस गंदे और संक्रमित पानी के संपर्क में आने से स्थानीय लोगों में त्वचा संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। रोजाना जलभराव वाली सड़कों से गुजरने के कारण कई निवासियों और बच्चों के पैरों में गंभीर खुजली, एलर्जी और दाद जैसे संक्रमण देखे जा रहे हैं। बिना किसी उचित सीवर निकास व्यवस्था के, लोगों को इस नरकीय वातावरण में रहने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

लीला विहार कॉलोनी के आक्रोशित नागरिकों ने अब जिला प्रशासन और नगर परिषद के उच्च अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। लोगों का कहना है कि यदि युद्धस्तर पर सीवर व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया और क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों ने गंभीर रूप लिया, तो इसके लिए पूरी तरह से नगर परिषद के अधिकारी जवाबदेह होंगे। प्रशासन की लापरवाही से परेशान जनता अब केवल समाधान चाहती है, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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