कांगड़ा के घट्टा टोल प्लाजा पर भारी टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, वसूली रुकवाई, फोरलेन किनारे गाड़ा तंबू हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 5
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित घट्टा टोल प्लाजा पर टोल दरों में भारी इजाफे के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया। 6 नवंबर को सैकड़ों महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने टोल वसूली बंद करवा दी और एनएचएआई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबे आंदोलन की चेतावनी दी है।

घट्टा टोल प्लाजा पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, टोल वसूली बंद

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रानीताल स्थित घट्टा टोल प्लाजा पर टैक्स में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। आसपास के गांवों के निवासियों ने एकजुट होकर टोल प्लाजा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और टोल वसूली को पूरी तरह से ठप करवा दिया। 6 नवंबर को पूर्व घोषित महा-आंदोलन के तहत सैकड़ों ग्रामीण मौके पर एकत्रित हुए और टोल प्लाजा को तुरंत प्रभाव से यहां से हटाने की मांग की।

प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए घट्टा टोल प्लाजा संघर्ष समिति ने फोरलेन सड़क के किनारे बाकायदा तंबू गाड़ दिए हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या विशेष गांव का नहीं है, बल्कि पूरे चंगर क्षेत्र और आम जनता से जुड़ा मुद्दा है। देहरा और आसपास के अस्पतालों की तरफ जाने वाले मरीजों और आम लोगों को रोज-रोज भारी भरकम टोल देना पड़ रहा है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में खुला जाम, 14 नवंबर को होगी बैठक

हंगामे और सड़क जाम की सूचना मिलते ही कांगड़ा के विधायक पवन काजल और एसडीएम कांगड़ा अंजलि तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों के साथ लंबी बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर लगा जाम तो खोल दिया, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर मौके पर डटे रहे।

रानीताल के प्रधान अभिनव ने बताया कि इस प्रदर्शन में महिला मंडल और आसपास की 400-500 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर ग्रामीणों की बात सुनने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और जो ढाई घंटे के लिए यातायात बाधित हुआ, उसके लिए पूरी तरह से एनएचएआई जिम्मेदार है। प्रधान अभिनव ने कहा कि वर्तमान में टोल वसूली बंद कर दी गई है और प्रशासन ने 14 नवंबर को बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने इस प्रदर्शन को महज एक 'ट्रेलर' करार देते हुए लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहने की बात कही।

1 नवंबर से बढ़ी टोल दरें, अधूरा हाईवे बना विवाद का कारण

घट्टा टोल प्लाजा पर विवाद की मुख्य वजह 1 नवंबर से लागू हुई नई टोल दरें हैं। शिमला-मटौर नेशनल हाईवे-88 पर स्थित इस टोल प्लाजा पर कारों और जीपों के लिए एक दिन में आने-जाने का शुल्क 35 रुपये से सीधे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। टोल शुल्क में हुई इस लगभग तीन गुना बढ़ोतरी से स्थानीय वाहन चालकों में बेहद नाराजगी है।

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि शिमला-मटौर फोरलेन हाईवे का निर्माण कार्य अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है। स्थानीय निवासियों को अपने रोजाना के कामकाज के लिए फोरलेन के महज कुछ ही किलोमीटर हिस्से का उपयोग करना पड़ता है। ऐसे में चंद किलोमीटर के सफर के लिए रोजाना 100 रुपये टोल देना उनके बजट पर बहुत भारी पड़ रहा है। इसी वजह से ग्रामीण टोल प्लाजा को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

स्थानीय लोगों के लिए केंद्र सरकार के पास नियम

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को राहत देने के उद्देश्य से विशेष पास योजना की घोषणा की थी। इस योजना के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • 20 किलोमीटर का दायरा: टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासी इस सुविधा के पात्र हैं।
  • वैध फास्ट टैग अनिवार्य: वाहन मालिक के पास अपने निजी गैर-व्यावसायिक वाहन पर वैध और सक्रिय FASTag होना आवश्यक है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शुल्क: ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पात्र लोगों के लिए सालाना पास की कीमत 1,500 रुपये रखी गई है।
  • शहरी क्षेत्रों के लिए दरें: म्युनिसिपल (नगर निगम/नगर परिषद) सीमा में स्थित टोल दायरे के पात्र निवासियों के लिए सालाना पास 3,000 रुपये में तय किया गया है।
  • मासिक पास का विकल्प: चालकों के लिए 360 रुपये का मासिक पास लेने का विकल्प भी दिया गया है, जो केवल संबंधित टोल प्लाजा पर ही मान्य होगा।

इसके बावजूद घट्टा टोल प्लाजा पर अचानक बढ़ाई गई दरों और अधूरे पड़े फोरलेन निर्माण के कारण स्थानीय निवासियों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है और वे 14 नवंबर की बैठक तक अपना विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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