दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण: विरोध प्रदर्शनों में चेहरे की पहचान के जरिए नहीं हो रही गिरफ्तारियां, वायरल मैसेज निकला फर्जी दिल्ली एक दिन पहले 6
सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस के नाम से एक फर्जी संदेश तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से प्रदर्शनकारियों को पकड़ा जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है और इसे भ्रम फैलाने वाली साजिश बताया है।

सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना का जाल

हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दिल्ली पुलिस के नाम से एक संदेश काफी वायरल हो रहा है, जिसने आम लोगों के बीच डर और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इस संदेश में दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सीजेपी (CJP) प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले लोगों की पहचान की है। वायरल मैसेज में कहा गया है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से उन लोगों को चिन्हित किया जा रहा है जो प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। हालांकि, अब दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ करते हुए इस मैसेज को पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी करार दिया है।

वायरल मैसेज में किए गए बेबुनियाद दावे

इस फर्जी संदेश में एक धमकी भरे लहजे का इस्तेमाल किया गया है ताकि प्राप्तकर्ता को डराया जा सके। संदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस जैसे प्रतिबंधित इलाकों में उस समय मौजूद था जब वहां धाराएं लागू थीं। संदेश में आगे कहा गया है कि 48 घंटे के भीतर व्यक्ति को अपनी लिखित सफाई पेश करनी होगी। साथ ही, इसमें यह भी लिखा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उस व्यक्ति को दिल्ली नेशनल कैपिटल टेरिटरी छोड़ने की अनुमति नहीं है। मैसेज में यह दावा भी किया गया है कि पुलिस के पास संबंधित व्यक्ति के उपकरणों की निगरानी करने का एक्सेस है और उनकी लोकेशन की ट्रैकिंग 24 घंटे की जा रही है। अंत में कानून का डर दिखाकर इसे और अधिक आधिकारिक दिखाने की कोशिश की गई है।

पुलिस का खंडन और जनता को चेतावनी

दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इस दावे का सिरे से खंडन किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कोई भी अनैतिक या गैर-कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी की भी स्वतंत्रता पर इस तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही इस तकनीक के माध्यम से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। यह पूरा नोटिस फर्जी है और इसका उद्देश्य सिर्फ समाज में अशांति फैलाना और दिल्ली पुलिस की छवि खराब करना है।

अफवाहों से बचने की सलाह

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे इस तरह की किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें और न ही इसे सोशल मीडिया पर आगे साझा करें। पुलिस का कहना है कि ऐसी कोई भी आधिकारिक सूचना हमेशा उनके सत्यापित आधिकारिक हैंडल और वेबसाइट पर ही साझा की जाती है। 'सत्यमेव जयते' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर संदेश को असली रूप देने की कोशिश की गई है, जिससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। पुलिस ने साफ किया है कि इस तरह के मैसेज से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसमें एक प्रतिशत भी सच्चाई नहीं है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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