दिल्ली में CJP का प्रदर्शन जारी रहने का दावा, जानिए आखिर कैसे विफल रही आज की सारी रणनीति भारत 9 घंटे पहले 2
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन की जो चेतावनी दी गई थी, वह दिल्ली पुलिस की सख़्त घेराबंदी के आगे पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने अब रविवार को भी अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

आज का दिन बना कॉकरोच जनता पार्टी के लिए निराशा का कारण

अक्टूबर की 10 तारीख को लेकर लंबे समय से जिस बड़े प्रदर्शन की चर्चा हो रही थी, वह आखिरकार उम्मीदों के विपरीत साबित हुआ। सरकार को हिला देने और दिल्ली की सड़कों पर भारी भीड़ जुटाने के जो दावे किए गए थे, वे आज पूरी तरह से बेअसर नजर आए। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जो नजारा देखने को मिला, वह 20 जुलाई की घटनाओं से बिल्कुल उलट था। यह दिन विपक्षी एकता और विरोध प्रदर्शन के नाम पर एक बड़ा फ्लॉप शो साबित हुआ, जहां बड़े-बड़े नेताओं के आने की बातें केवल कागजी साबित हुईं।

विपक्ष के दिग्गजों की अनुपस्थिति ने खड़े किए सवाल

प्रदर्शन की तैयारियों के बीच यह भी देखा गया कि विपक्षी खेमे के प्रमुख चेहरे पूरी तरह गायब रहे। ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के आवास से प्रस्थान तो किया, लेकिन वे जंतर-मंतर के निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंच सकीं। अरविंद केजरीवाल भी प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में विफल रहे। राहुल गांधी की बात करें तो वे जंतर-मंतर की दिशा में जाने के बजाय चेन्नई के लिए रवाना हो गए। वहीं, अखिलेश यादव दिल्ली आने की जगह सैफई की ओर रुख कर गए। विपक्षी एकता के नाम पर 'वोट चोरी' के जिस मुद्दे को उठाया गया था, उसकी सच्चाई आज सबके सामने आ गई। कॉकरोच जनता पार्टी ने अब स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन रविवार को भी जारी रखा जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि सुरक्षा की इतनी अभेद्य व्यवस्था के बीच यह कैसे संभव होगा।

दिल्ली पुलिस की अभेद्य किलेबंदी और 30 हजार जवानों की तैनाती

जंतर-मंतर के इस दूसरे चरण को शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने अपनी जबरदस्त रणनीतिक कुशलता से थाम लिया था। राष्ट्रीय राजधानी के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और जंतर-मंतर के आसपास 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। हर प्रमुख रास्ते पर बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद थी। जो भी प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने या बैनर-पोस्टर लहराने की कोशिश करता, उसे पुलिस मौके पर ही हिरासत में ले रही थी। जो कुछ लोग वहां तक पहुंच भी पाए, उनकी आवाज पुलिस की तैयारियों और शोर-शराबे में दबकर रह गई।

दोपहर के बाद पूरी तरह ठंडा पड़ा विरोध का शोर

दोपहर होते-होते जंतर-मंतर के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में बदल चुका था। कनॉट प्लेस, रीगल सिनेमा, मिंटो ब्रिज और आकाशवाणी भवन जैसे संवेदनशील इलाकों में जहां कहीं भी प्रदर्शनकारियों ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पुलिस ने तुरंत वहां से हटा दिया। अभिजीत दिपके, ध्रुव राठी और नेहा वोहरा जैसे नाम चर्चा में थे, लेकिन प्रदर्शन के दौरान इनमें से कोई भी प्रभावी नजर नहीं आया। दिल्ली पुलिस ने न केवल भारी संख्या में बल तैनात किया, बल्कि सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी और दर्जनों ड्रोन्स का उपयोग भी किया। सड़कों पर कीलें बिछाई गई थीं ताकि स्थिति अनियंत्रित न हो। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक जो कनॉट प्लेस के आसपास पहुंचे भी, वे दिशाहीन नजर आए और कुछ ही समय में या तो वापस लौट गए या उन्हें हिरासत में ले लिया गया। दोपहर तक स्थिति यह थी कि सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या के मुकाबले दिल्ली पुलिस के डिटेंशन सेंटर्स में लोगों की संख्या ज्यादा हो गई थी।

लुटियंस दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था

संसद मार्ग से लेकर रफी मार्ग तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा था। 20 जुलाई को जिन इलाकों में पत्थरबाजी और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं देखी गई थीं, वे आज बिल्कुल शांत और सुनसान थे। दिल्ली पुलिस इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी कि 20 जुलाई जैसी अराजकता दोबारा नहीं दोहराई जाएगी, इसलिए पूरे लुटियंस जोन में भारी पुलिस बल तैनात रहा। जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक पहुंचने में विफल रहे, तो वे अशोक रोड, रायसीना रोड, अकबर रोड, शाहजहां रोड और इंडिया गेट सर्किल की ओर बढ़ने लगे, लेकिन वहां भी पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कमर कस रखी थी।

विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पें और हिरासत

जब प्रदर्शनकारियों के मुख्य प्लान विफल हुए, तो कुछ समूहों ने अपनी रणनीति बदलते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ हिंदुत्व विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बाबा खड़ग सिंह मार्ग के निकट पुलिस जवानों को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी की गई। पुलिस ने धैर्य बनाए रखा और जैसे ही कनॉट प्लेस के पास भीड़ एकत्र हुई और नारेबाजी तेज हुई, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को वैन में भरकर वहां से हटा दिया।

अदालत तक पहुंचा हिरासत का मामला

आज का जंतर-मंतर का प्लान पूरी तरह नाकाम रहा, जिसका मुख्य कारण पुलिस का सर्विलांस सिस्टम और कमांड सेंटर से मिल रही रियल-टाइम सूचनाएं थीं। इस बीच, विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मुद्दे पर एक याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई के लिए रविवार को एक विशेष बेंच का गठन किया गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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