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एक घंटा पहले
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दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़
राजधानी दिल्ली में बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस ने संगम विहार इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी खुद को नामी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर युवाओं को रोजगार दिलाने का झूठा सपना दिखाते थे और उनसे अलग-अलग शुल्क के नाम पर लगातार पैसे ऐंठते थे। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड यानी AATS ने पूरी योजना के साथ छापेमारी की और इस धोखाधड़ी का अंत किया।
जांच की शुरुआत और छापेमारी
पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा 1 सितंबर को मिली एक खुफिया सूचना के आधार पर हुआ। पुलिस को जानकारी मिली थी कि संगम विहार के झरोदा माजरा इलाके में एक संदेहास्पद कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। जांच में यह सामने आया कि इस केंद्र का एकमात्र उद्देश्य नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को झांसे में लेकर उनकी मेहनत की कमाई लूटना था। सूचना की पुष्टि होने के बाद, पुलिस की टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए मौके पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान वहां कई कर्मचारी टेली-कॉलर के रूप में काम करते हुए पाए गए, जो अलग-अलग उम्मीदवारों को फोन कर रहे थे।
कैसे काम करता था ठगों का गिरोह
आरोपियों का काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित था। वे मुख्य रूप से उन बेरोजगारों को अपना निशाना बनाते थे, जिन्होंने 'जॉब है सपोर्ट' नाम के ऐप के जरिए विभिन्न कंपनियों में आवेदन किया था। ये ठग विशेष रूप से उन लोगों को टारगेट करते थे जिन्होंने टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन किया होता था। आरोपियों का गिरोह उन उम्मीदवारों को फोन करता और दावा करता कि उनका प्रोफाइल शॉर्टलिस्ट हो गया है। उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसे पदों पर नियुक्ति का लालच दिया जाता था।
छोटे निवेश से बड़ा जाल
ठगी की शुरुआत बेहद मामूली रकम से की जाती थी। उम्मीदवारों को बताया जाता था कि रिक्रूटमेंट प्रोसेस के लिए शुरुआती 499 रुपये का कूरियर चार्ज देना अनिवार्य है। एक बार जब शिकार इस राशि को जमा कर देता, तो ठगों का असली खेल शुरू होता था। इसके बाद वे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के बहाने बार-बार पैसे की मांग करते थे। युवाओं को यह विश्वास दिलाया जाता था कि बस थोड़ा और पैसा जमा करते ही उनकी नौकरी पक्की हो जाएगी, जिससे वे लगातार भुगतान करते रहते थे।
पीड़ितों को ब्लॉक करने का तरीका
जब कोई पीड़ित और पैसे देने से मना कर देता या किसी कारणवश पैसे देने में असमर्थता जताता, तो ये आरोपी तुरंत उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते थे। इसके बाद, पीड़ित व्यक्ति के साथ सभी तरह के संपर्क काट दिए जाते थे और उनसे किए गए वादे हवा में उड़ जाते थे। ये लोग बड़ी ही चालाकी से पूरी प्रक्रिया को एक वास्तविक भर्ती प्रक्रिया की तरह दिखाने की कोशिश करते थे, जिससे आम लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
पुलिस की बरामदगी
पुलिस की छापेमारी के दौरान इस फर्जी कॉल सेंटर से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। इस बरामदगी में निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं:
- 9 मोबाइल फोन
- 1 टैबलेट
- 7 डेबिट कार्ड
- 2 बैंक पासबुक
- 3 नोटपैड जिनमें दर्जनों मोबाइल नंबर लिखे हुए थे
- 6,730 रुपये नकद
फिलहाल पुलिस इन बरामद दस्तावेजों और उपकरणों के माध्यम से यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है और इनके तार कहां-कहां तक फैले हुए हैं। पुलिस की यह कार्रवाई बेरोजगार युवाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच कर लें।
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