उत्तराखंड में मानसून का कहर: भारी बारिश का रेड अलर्ट, कई रास्ते बंद और जल संकट से जूझ रहे लोग उत्तराखंड 4 घंटे पहले 3
उत्तराखंड में मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। चमोली में भूस्खलन और हल्द्वानी में जल संकट के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं।

भारी बारिश का अलर्ट और मौसम का मिजाज

मौसम विभाग ने 06 सितंबर को उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों के लिए चेतावनी जारी की है। राज्य के देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी, हरिद्वार और चमोली जिलों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत और उधम सिंह नगर समेत राज्य के अन्य सभी जिलों में तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

भूस्खलन से ठप हुआ यातायात

बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। चमोली जिले में भारी लैंडस्लाइड के कारण हेमकुंड साहिब और बदरीनाथ जाने वाले प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। इसके साथ ही पिथौरागढ़ की चौदास घाटी का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे वहां के निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हल्द्वानी में पानी की भारी किल्लत

मौसम की मार का असर बुनियादी सुविधाओं पर भी पड़ रहा है। हल्द्वानी में गौला नदी के पानी में अधिक मात्रा में गाद (सिल्ट) आने के कारण जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे शहर में पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन पानी की समस्या से निपटने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन नदी की स्थिति में सुधार न होने तक संकट बरकरार रहने की आशंका है।

पर्यटकों और यात्रियों के लिए हिदायत

मौसम विभाग ने उन सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है जो संवेदनशील पहाड़ी इलाकों की यात्रा कर रहे हैं। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से बचने और मौसम साफ होने का इंतजार करने की कड़ी हिदायत दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने यात्रा करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने का आग्रह किया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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