उत्तराखंड में भारी बारिश का तांडव: 6 जिलों के लिए रेड-ऑरेंज अलर्ट जारी, बद्रीनाथ और गंगोत्री हाईवे पर थमा यातायात उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड में मानसून की जबरदस्त सक्रियता के बीच मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल समेत 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट दिया है, जिसके चलते कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन के कारण बाधित हो गए हैं।

उत्तराखंड में बारिश का अलर्ट और मौसम का हाल

देवभूमि उत्तराखंड में मॉनसून का कहर लगातार जारी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आज 02 अगस्त को राज्य के 6 प्रमुख जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इनमें देहरादून, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल जिले शामिल हैं। इन इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, इन क्षेत्रों में गरज और चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।

केवल पर्वतीय जिले ही नहीं, बल्कि मैदानी इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जनपदों में भी बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। राज्य भर में लगातार हो रही बारिश से तापमान में भी काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो पंतनगर में अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक रहा। वहीं, नैनीताल के मुक्तेश्वर में पारा लुढ़ककर 15.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सबसे कम तापमान है। पहाड़ों में हो रही बारिश के कारण नदी और नाले उफान पर हैं, जिससे आम जनता और प्रशासन दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अगले 24 घंटों का पूर्वानुमान और यात्रा के लिए चेतावनी

मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटों को अत्यंत संवेदनशील घोषित किया है। पूरे उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। केवल आज ही नहीं, बल्कि 03, 04 और 05 अगस्त को भी राज्य के पर्वतीय जिलों में बारिश से राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस अवधि के दौरान देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश का क्रम बना रहेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक नमी और बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा कई गुना बढ़ चुका है। आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे सफर शुरू करने से पहले रास्तों की स्थिति की पूरी जानकारी अवश्य ले लें।

आगामी सप्ताह का मौसम मिजाज: 3 से 7 अगस्त तक का विवरण

मौसम विज्ञान केंद्र ने पूरे सप्ताह के लिए विस्तृत चेतावनी जारी की है, जिससे स्पष्ट है कि मानसून अभी अपनी चरम सक्रियता पर है:

  • 03 अगस्त: देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश की आशंका है।
  • 04 अगस्त: देहरादून, टिहरी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट है।
  • 05 अगस्त: देहरादून, टिहरी, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी वर्षा की संभावना बनी रहेगी।
  • 06 और 07 अगस्त: राज्य के लगभग सभी जनपदों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें जारी रहेंगी।

पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करना इस समय जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि भूस्खलन कहीं भी कभी भी हो सकता है।

उत्तरकाशी में यमुना का रौद्र रूप और हाईवे की स्थिति

उत्तरकाशी जिले में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। स्यानाचट्टी इलाके में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। नदी का उफान इतना अधिक है कि पानी किनारे बने रिहायशी मकानों और दुकानों की दीवारों को छूने लगा है। स्थानीय लोग दहशत में हैं और सरकार से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की गुहार लगा रहे हैं। इसके साथ ही गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन ने यातायात को पूरी तरह बाधित कर दिया है। गंगोत्री हाईवे पर डबरानी और हेलगूगाड़ के पास भारी मलबा आने से कांवड़ यात्रियों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। हालांकि डबरानी के पास सड़क को किसी तरह बहाल कर दिया गया है, लेकिन यमुनोत्री मार्ग पर हनुमान चट्टी-बाड़िया, दूरबिल कट, जंगल चट्टी, बनास और सियाणा चट्टी के पास भारी मलबे के कारण मार्ग अभी भी ठप है।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ NH-58 की बाधाएं और चमोली में जनजीवन

चमोली जिले में ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) पर आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। भनेरपानी और नंदप्रयाग के पास पहाड़ों से गिरा भारी मलबा और चट्टानें रास्ते में जमा हो गई हैं। सड़क बंद होने के चलते बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर निकले सैकड़ों तीर्थयात्री और उनके वाहन जगह-जगह फंस गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मलबा हटाने में जुटी है, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश काम में लगातार बाधा डाल रही है। पाणा क्षेत्र से एक डरावनी तस्वीर भी सामने आई है, जहां उफान पर चल रहे बरसाती नाले को पार करना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इन बच्चों ने रिस्क लेने के बजाय नाले का वीडियो बनाकर शिक्षकों को भेजा और मदद की गुहार लगाई है। चमोली की कई ग्रामीण सड़कें भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गई हैं।

पौड़ी गढ़वाल का खतरनाक सफर: NH-534 बना डेंजर जोन

पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-534) पर यात्रा करना जानलेवा हो गया है। विशेषकर कोटद्वार से दुगड्डा और गुमखाल से सतपुली के बीच कई स्थान ऐसे बन गए हैं जिन्हें प्रशासन ने ‘डेंजर जोन’ घोषित किया है। पहाड़ों से लगातार गिरते भारी बोल्डर और पत्थरों ने इस मार्ग को बेहद खतरनाक बना दिया है। हाल ही में सतपुली के पास एक दुखद हादसे में दो यात्रियों की जान भी जा चुकी है। सड़क चौड़ीकरण और कटिंग के काम के कारण भी जगह-जगह मलबा बिखरा पड़ा है। पौड़ी की जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई है और मलबे को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे जेसीबी मशीनें तैनात रखने का आदेश दिया गया है।

बागेश्वर और नैनीताल: पेड़ गिरने से यातायात पर असर

बागेश्वर जिले में बारिश के दौरान ताकुला रोड स्थित आरटीओ कार्यालय के पास एक विशाल पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। मौके पर पहुंची फायर स्टेशन की टीम ने वुड कटर की मदद से पेड़ को काटकर हटाया और काफी मशक्कत के बाद सड़क को दोबारा चालू कराया। वहीं, नैनीताल जिले का मुक्तेश्वर आज राज्य में सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। प्रशासन ने दोनों जिलों के निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों के किनारे बिल्कुल न जाएं और जब तक बहुत जरूरी न हो, यात्रा से बचें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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