मुंबई में कचरा फैलाने वालों की अब खैर नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को दिए आपराधिक कार्रवाई के निर्देश महाराष्ट्र 3 महीने पहले 69
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और प्लास्टिक फेंकने के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए बीएमसी को दंडात्मक कदम उठाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि शहर को साफ रखने के लिए अब नियमों का पालन सख्ती से अनिवार्य है।

कचरा फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और खुले इलाकों में कचरा व प्लास्टिक फेंकने वालों के विरुद्ध एक कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी को निर्देशित किया है कि वह ऐसे लोगों के खिलाफ न केवल जुर्माना लगाए, बल्कि जरूरत पड़ने पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज करे। न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जोर देकर कहा कि नागरिकों की बढ़ती लापरवाही का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है और यह नगर निगम के संसाधनों पर भी अनावश्यक भार डाल रही है। अदालत ने माना कि मौजूदा स्थिति में इस समस्या का समाधान केवल सख्त कानूनी डंडा और उल्लंघनकर्ताओं के प्रति कठोर कार्रवाई से ही संभव है। यह निर्देश कांजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाली दुर्गंध और गैस रिसाव संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए गए हैं।

पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा

अदालत ने मानसून का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि किस प्रकार समुद्र में फेंका गया कचरा और प्लास्टिक वापस शहर के तटों पर लौट आता है। समुद्र की गहराई में जमा हो रहा कचरा जलीय जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। इसके अतिरिक्त, मुंबई के घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नाले भी कचरे के कारण लगातार चोक हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने सभी वार्ड अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सुनिश्चित करें कि नालों को समय रहते ढका जाए ताकि वे कचरे के ढेर या 'मिनी डंपिंग साइट' में तब्दील न हों। अदालत ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि इस समस्या को तत्काल प्रभाव से नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में इसके परिणाम बेहद भयावह और दूरगामी होंगे।

नागरिकों को निभानी होगी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी

पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में नागरिक अनुशासन की कमी है, जबकि अन्य देशों में सख्त कानूनों के चलते लोग नियमों का पालन करना अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते हैं। अदालत का मानना है कि अब समय आ गया है कि मुंबई के निवासी अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी को समझें और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। बीएमसी के अधिकारियों को भी साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि वे विशेष रूप से उन झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता बनाए रखने से पीछे न हटें जिनका अभी तक पुनर्विकास नहीं हो सका है। स्वास्थ्य और साफ-सफाई किसी भी वार्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

वार्ड स्तर पर बनेगी नई कार्ययोजना

केवल चुनिंदा इलाकों को चमकाने से शहर की समस्या हल नहीं होगी। हाईकोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया है कि वे पूरे मुंबई शहर के हर वार्ड, गली, फुटपाथ और सड़क के लिए एक विस्तृत और व्यापक कार्ययोजना तैयार करें। अदालत ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि वार्ड-वार मोबाइल शिकायत ऐप शुरू करने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि नागरिक अपनी शिकायतों को सीधे दर्ज करा सकें और उन पर त्वरित कार्रवाई हो सके। अंत में, अदालत ने जनता, जनप्रतिनिधियों और एनजीओ से आह्वान किया कि वे मिलकर काम करें ताकि मुंबई में स्वच्छता और स्वास्थ्य के बेहतर मानक स्थापित किए जा सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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