मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, कांग्रेस उम्मीदवार ने दी RO के फैसले को चुनौती भारत एक महीने पहले 43
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्यसभा के लिए मतदान 18 जून को होना है।

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देते हुए इसे गलत, पक्षपातपूर्ण और कानून के खिलाफ करार दिया है और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। कांग्रेस नेता ने अदालत से इस मामले की जल्द सुनवाई करने का भी आग्रह किया है। राज्यसभा के लिए मतदान 18 जून को होना है। रिटर्निंग ऑफिसर और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रधान सचिव अरविंद शर्मा ने 9 जून को नटराजन की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी।

यह कानूनी पहल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नटराजन का नामांकन पत्र खारिज किए जाने के बाद की गई है। सत्तारूढ़ भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने अपने नामांकन पत्रों के साथ संलग्न हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई थी। हालांकि, नटराजन ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है और कहा है कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं है। उनके मुताबिक जिस केस का जिक्र किया जा रहा है, वह महज एक निजी शिकायत से जुड़ा है।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रखी यह मांग

इससे पहले बुधवार को कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि नटराजन के विरुद्ध किसी निजी शिकायत पर अब तक किसी अदालत ने संज्ञान नहीं लिया है, इसलिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को उन्हें अयोग्य ठहराने वाले रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को वापस लेना चाहिए।

सिंघवी का तर्क — धारा 33A का दायरा

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अपने ही कानून 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) में धारा 33A का प्रावधान है, जिसके तहत केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है, जिनमें दो साल से अधिक की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि नटराजन का नामांकन "संज्ञान न लिए जाने" के आधार पर खारिज किया गया, जबकि यह ऐसा कोई आपराधिक मामला है ही नहीं जिसकी जानकारी उन्हें हलफनामे में देनी जरूरी होती।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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