शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से पहले ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव, अमेरिकी विमान के बाद चीन ने उतारे युद्धपोत विश्व 3 घंटे पहले 2
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से ठीक पहले ताइवान जलडमरूमध्य में सैन्य हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी नौसेना के विमान के गुजरने के बाद चीन ने वहां अपने युद्धपोत और विमानों की तैनाती बढ़ा दी है।

इंडो-पैसिफिक में सैन्य हलचल

चीन और अमेरिका के बीच चल रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा एक बार फिर ताइवान जलडमरूमध्य के केंद्र में आ गई है। शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना का P-8A पोसाइडन विमान ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरा, जिसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और अधिक बढ़ गया है। इस घटना के अगले ही दिन ताइवान प्रशासन ने अपने समुद्री और हवाई क्षेत्र के आसपास चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सक्रियता दर्ज की। ताइवान के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वहां चीन के 3 विमान, 8 नौसैनिक जहाज और 7 सरकारी जहाज देखे गए हैं। ताइवान ने स्पष्ट किया कि तीनों चीनी विमानों ने अनौपचारिक रूप से मानी जाने वाली मीडियन लाइन को पार किया और उसके उत्तरी तथा दक्षिण-पश्चिमी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में घुसपैठ की।

अमेरिकी रुख और चीन की प्रतिक्रिया

अमेरिकी 7वीं फ्लीट ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके P-8A पोसाइडन विमान का यह सफर पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में था। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कदम एक फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, चीन की ओर से इसे काफी संजीदगी से लिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, चीनी सेना ने पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिकी विमान की निगरानी की और उसे ट्रैक किया। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से दावा किया कि इस दौरान स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में थी। अमेरिका का रुख साफ है कि जहां अंतरराष्ट्रीय कानून उन्हें अनुमति देते हैं, वहां उनकी सेना उड़ान, नौवहन और अपना संचालन जारी रखेगी। चीन लंबे समय से ताइवान जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का कड़ा विरोध करता रहा है।

कूटनीतिक चर्चा के बीच शक्ति प्रदर्शन

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी टाइमिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने अमेरिका दौरे की संभावनाएं हैं, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हो सकती है। दोनों देश व्यापार, उन्नत तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में ताइवान जलडमरूमध्य में यह सैन्य गतिविधि दोनों महाशक्तियों के बीच जटिल रिश्तों की असलियत को बयां करती है। एक तरफ बातचीत की मेज पर जाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ समुद्र और आसमान में शक्ति प्रदर्शन जारी है।

ताइवान की रक्षा तैयारी

चीन के बढ़ते दबाव के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा और सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के लिए अपने रक्षा बजट में 18 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यह पहला मौका है जब ताइवान का कुल रक्षा खर्च 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। प्रस्तावित रक्षा बजट का कुल मूल्य करीब 1.1225 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर यानी 31.41 अरब डॉलर आंका गया है। यह ताइवान की कुल GDP का 3 फीसदी से अधिक हिस्सा है। ताइवान इस अतिरिक्त धन का मुख्य रूप से ड्रोन और मिसाइल तकनीक को अपग्रेड करने में उपयोग करना चाहता है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन हथियारों पर खर्च की योजनाएं पूर्व में संसद से पारित नहीं हो पाई थीं, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इन्हें प्राथमिकता दी गई है।

चीन का लगातार बढ़ता सैन्य दबाव

ताइवान का रक्षा मंत्रालय लगातार पड़ोसी देश की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को ताइवान के आसपास चीन की नौसेना के 7 जहाज और 6 सरकारी जहाज देखे गए थे। वहीं, गुरुवार को PLA के 7 विमान, 8 नौसैनिक जहाज और 6 सरकारी जहाज दर्ज किए गए थे। इनमें से 5 चीनी विमानों ने ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी ADIZ में प्रवेश किया था। ताइवान की सेना ने कहा कि वह पूरी स्थिति की निगरानी कर रही है और अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उचित जवाबी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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