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45 मिनट पहले
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चीन के स्पेस मिशन में पाकिस्तान की भागीदारी
चीन की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी, जिसे CMSA के नाम से जाना जाता है, ने अपने आगामी शेनझोउ-24 मिशन के लिए एक पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट को शामिल करने का निर्णय लिया है। यह एस्ट्रोनॉट चीन के अंतरिक्ष स्टेशन तिआंगोंग तक जाने वाला दुनिया का पहला विदेशी नागरिक होगा। पाकिस्तान इस घटनाक्रम को एक बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस पूरे मिशन में रॉकेट, तकनीक, ईंधन और नेविगेशन प्रणाली पूरी तरह से चीन की है। पाकिस्तानी पायलटों को केवल चीनी भाषा सीखने और वहां पहुंचकर एक सप्ताह तक छोटे-मोटे प्रयोग करने का काम सौंपा गया है।
उधारी की सवारी का सच
जब कोई राष्ट्र अपनी मशीनरी, रॉकेट या स्वदेशी तकनीक के बिना अंतरिक्ष की यात्रा करता है, तो उसे कूटनीतिक भाषा में उधारी की सवारी कहा जा सकता है। पाकिस्तान का यह अंतरिक्ष अभियान मजाक का विषय बन गया है क्योंकि चीन के सहयोग के बिना उनका अपना कोई स्पेस प्रोग्राम नहीं है। पाकिस्तान की अपनी स्पेस एजेंसी सुपारको की भूमिका इसमें नगण्य है। इसे आप एक लग्जरी कार में पिछली सीट पर बैठकर यात्रा करने जैसा मान सकते हैं, जहां गाड़ी और ड्राइवर दोनों दूसरे देश के हैं।
कौन होगा अंतरिक्ष यात्री?
पाकिस्तान की ओर से दो पायलटों, जीशान अली और खुर्रम दाऊद को बीजिंग के एस्ट्रोनॉट रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में कई महीनों तक कठोर प्रशिक्षण दिया गया है। इन दोनों में से ही एक को मुख्य यात्री के रूप में चुना जाएगा, जो शेनझोउ-24 मिशन का हिस्सा बनेगा। दूसरा पायलट बैकअप की भूमिका में जमीन पर रहकर स्थिति पर नजर रखेगा। यह पूरी तरह से चीन द्वारा संचालित चयन प्रक्रिया है जिसमें पाकिस्तान के पास कोई खास अधिकार नहीं हैं।
पेलोड स्पेशलिस्ट की जिम्मेदारी
पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट को मिशन में पेलोड स्पेशलिस्ट का पद दिया गया है। सरल शब्दों में, रॉकेट उड़ाने या अंतरिक्ष स्टेशन को नियंत्रित करने में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी। वे एक वैज्ञानिक यात्री के समान हैं, जिनका कार्य चीनी वैज्ञानिकों द्वारा पहले से निर्धारित बायो-टेक्नोलॉजी आधारित प्रयोगों की देखरेख करना होगा। इसके अलावा, उन्हें चीनी स्पेस स्टेशन के वातावरण में सामंजस्य बिठाने के लिए मंदारिन भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। चूँकि स्टेशन के सभी कंट्रोल पैनल और बटन चीनी भाषा में हैं, इसलिए आपातकालीन स्थिति में तकनीकी दक्षता से अधिक भाषाई ज्ञान महत्वपूर्ण साबित होगा।
मिशन की अनोखी लॉजिस्टिक्स
चीन ने इस मिशन के लिए एक दिलचस्प ड्रॉप एंड पिक प्लान तैयार किया है, जो किसी शेयरिंग टैक्सी सर्विस जैसा प्रतीत होता है। पाकिस्तानी यात्री शेनझोउ-24 स्पेसक्राफ्ट के जरिए तिआंगोंग स्पेस स्टेशन तक पहुंचेगा। वहां एक हफ्ते की मेहमाननवाजी के बाद, वह पहले से अंतरिक्ष में मौजूद शेनझोउ-23 कैप्सूल में सवार होकर धरती पर वापस लौटेगा। यह तकनीक के स्तर पर चीन का पूर्ण नियंत्रण दर्शाता है।
आर्थिक तंगी और अंतरिक्ष का सपना
पाकिस्तान की घरेलू स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। देश में बिजली और गैस का गहरा संकट है, मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर है और अर्थव्यवस्था IMF की ऋण किश्तों पर निर्भर है। ऐसे में अंतरिक्ष मिशन पर संसाधनों का ध्यान केंद्रित करना अजीब लगता है। हालांकि, चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पाकिस्तान को यह फ्री राइड देकर कूटनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, चीन जिन्ना-1 नामक एक छोटा लूनर रोवर भी चांद पर भेजने की योजना बना रहा है। 35 किलो के इस रोवर का काम चांद की मिट्टी, प्लाज्मा और रेडिएशन का अध्ययन करना होगा।
समय सीमा और ढिंढोरा
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि 25 नवंबर को उनका अंतरिक्ष यात्री मिशन के लिए रवाना हो जाएगा। हालांकि, चीन की CMSA ने आधिकारिक रूप से लॉन्च की कोई पक्की तारीख घोषित नहीं की है और न ही किसी नाम को अंतिम रूप दिया है। अक्सर पाकिस्तानी राजनेता काम पूरा होने से पहले ही उसकी घोषणा करने की जल्दी दिखाते हैं।
अंतरिक्ष की दौड़ और कूटनीति
कूटनीतिक दृष्टि से देखें तो चीन अंतरिक्ष अनुसंधान में अमेरिका और रूस को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। जबकि अमेरिका और रूस 2030 तक चांद पर परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की दौड़ में लगे हैं, चीन अपने तिआंगोंग स्पेस स्टेशन को एक अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में विकसित कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर अपना प्रभाव जमा सके। इस महाशक्तिशाली संघर्ष के बीच पाकिस्तान को बस इतना लाभ मिल रहा है कि वह दुनिया के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है, भले ही इसके लिए उसे चीनी भाषा सीखकर और विदेशी वैज्ञानिकों के इशारे पर काम करना पड़ रहा हो।
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