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3 घंटे पहले
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चीन की सर्वोच्च सैन्य कमान में इस समय एक बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) से दो सबसे वरिष्ठ और बेहद रसूखदार अधिकारियों झांग यूशिया और लियू झेनली को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। चीनी सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के संदेह में जांच चल रही थी, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब सात सदस्यों वाले राज्य CMC में केवल दो ही सक्रिय सदस्य बचे हैं, जिनमें खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हैं। इसे चीनी सेना के भीतर लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
गलवान घाटी विवाद के समय के चीनी कमांडर पर भी गिरी गाज
इस फेरबदल की आंच भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े रहे सैन्य अधिकारियों तक भी पहुंची है। चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था ने बुधवार को झाओ जोंगकी की सदस्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। गौरतलब है कि झाओ जोंगकी चीनी सेना की वेस्टर्न थिएटर कमान के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। वर्ष 2020 में जब लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक टकराव हुआ था, तब इसी वेस्टर्न थिएटर कमान की पूरी जिम्मेदारी झाओ जोंगकी के कंधों पर ही थी। इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि चीन की सेना के भीतर चल रही सफाई अभियान की जद में कई बड़े चेहरे आ चुके हैं।
शी जिनपिंग के बाद नंबर-दो अधिकारी भी निशाने पर
इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला नाम झांग यूशिया का है। झांग यूशिया को चीन की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था में बेहद शक्तिशाली माना जाता था। वह न केवल CMC के वाइस चेयरमैन थे, बल्कि चीन की सबसे ताकतवर राजनीतिक संस्था पोलित ब्यूरो के सदस्य भी थे। चीनी सैन्य ढांचे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ठीक बाद उनका दर्जा दूसरे नंबर पर आता था। वहीं दूसरे बर्खास्त अधिकारी लियू झेनली भी CMC के एक महत्वपूर्ण सदस्य होने के साथ-साथ इसके ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन दोनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों के खिलाफ यह एक्शन ऐसे समय में हुआ है जब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के भीतर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अनुशासनहीनता के मामलों को लेकर गहन जांच अभियान चलाया जा रहा है।
कमान में बचे सिर्फ दो सक्रिय सदस्य
झांग यूशिया और लियू झेनली जैसे शीर्ष नामों को हटाए जाने के बाद अब चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई दे रही है। सात सदस्यीय इस आयोग में अब केवल दो सक्रिय सदस्य ही बचे हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि चीन में सैन्य नियंत्रण के लिए कमान की समानांतर संरचनाएं काम करती हैं, जो कम्युनिस्ट पार्टी और देश (सरकार) दोनों स्तरों पर होती हैं। हालांकि, ये दोनों ही संरचनाएं व्यावहारिक तौर पर एक ही संस्था के रूप में काम करती हैं। हालिया कार्रवाई के तहत सरकार की राज्य स्तर वाली CMC से झांग और लियू के पदों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, हालांकि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सैन्य इकाई से उन्हें हटाए जाने की कोई औपचारिक घोषणा अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
12 सांसदों की सदस्यता भी की गई रद्द
चीनी सेना और सरकार में चल रही इस बड़ी कार्रवाई का दायरा केवल सैन्य मुख्यालय तक ही सीमित नहीं है। चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस (NPC) की ओर से जारी की गई ताजा सूची में झांग यूशिया और लियू झेनली के नामों को संसद सदस्य की सूची से हटा दिया गया है। इसके अलावा 10 अन्य सांसदों के खिलाफ भी कड़ा एक्शन लिया गया है, जिसके बाद कुल 12 सांसदों की सीटें चली गई हैं। इन हटाए गए अधिकारियों में निम्नलिखित प्रमुख नाम शामिल हैं:
- लेफ्टिनेंट जनरल झोंग शाओजुन: जो पूर्व में CMC जनरल ऑफिस के निदेशक के रूप में कार्यरत थे।
- जनरल जू चिएनशेंग: जो चीन की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स के पूर्व कमांडर रह चुके हैं।
- गाओ शीवेन: जो दक्षिण चीन के नानचांग शहर के पूर्व मेयर रह चुके हैं और पहले चीन की सरकारी एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी 'चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन' में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
साल 2012 से लगातार जारी है भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में चल रही यह कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। साल 2012 में जब से शी जिनपिंग ने चीन की सत्ता संभाली है, तब से उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक देशव्यापी और बेहद कड़ा अभियान चला रखा है। चीनी सेना हमेशा से इस अभियान के केंद्र में रही है। पिछले एक दशक से अधिक समय में चीन के कई रक्षा मंत्रियों, जनरलों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में सजा दी जा चुकी है या उन्हें पदों से बर्खास्त किया जा चुका है। अभी पिछले ही महीने, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक में सेना के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी इस अभियान को और ज्यादा आक्रामक और गहरा करने का स्पष्ट आह्वान किया था, जिसके बाद इस ताजा कार्रवाई को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
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