ब्रह्मपुत्र पर चीन का विशाल बांध: भारत के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां और विशेषज्ञ की सलाह? राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़ा जलविद्युत बांध बना रहा है, जिसे लेकर भारत में सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं। रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन मुद्दों को मजबूती से उठाने का सुझाव दिया है।

चीन की मेडोग परियोजना और भारत की चिंताएं

चीन द्वारा तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी की ऊपरी धारा पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इस बांध की क्षमता 60 हजार मेगावाट बताई गई है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक बनाती है। ब्रह्मपुत्र नदी, जिसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है, भारत में प्रवेश करने के बाद अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर बहती है और अंत में बांग्लादेश तक जाती है। इस नदी पर चीन के इस बड़े निर्माण कार्य से भारत के लिए जल प्रवाह, पर्यावरण और भूकंपीय सुरक्षा के लिहाज से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ब्रह्मा चेलानी की चेतावनी और रणनीति

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए भारत सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उनका मानना है कि भारत को इस परियोजना के खिलाफ अपनी आवाज और अधिक प्रखर करने की जरूरत है। चेलानी ने जोर दिया कि भारत को चीन के अपने ही वैज्ञानिकों द्वारा उठाई गई चेतावनियों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश करना चाहिए।

चीन की दोहरी नीति पर सवाल

सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए ब्रह्मा चेलानी ने एक तीखा सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि अगर भारत, चीन की सीमा के करीब इतनी बड़ी कोई परियोजना शुरू करता, तो बीजिंग किस तरह का व्यवहार करता। उनके अनुसार, चीन ऐसे में पर्यावरण, भूकंप और वैज्ञानिक खतरों का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी हंगामा खड़ा कर देता। चेलानी का स्पष्ट मानना है कि चीन के भीतर से आ रही वैज्ञानिक चिंताओं को वैश्विक स्तर पर उजागर करना भारत के लिए एक प्रभावी कूटनीतिक कदम हो सकता है।

नदी का पारिस्थितिकी तंत्र और भविष्य

यह परियोजना न केवल अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र, बल्कि पूरे असम और बांग्लादेश के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रह्मपुत्र नदी का प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र इस बांध के निर्माण से प्रभावित हो सकता है। भारत की सुरक्षा और पर्यावरणीय हितों की दृष्टि से यह निर्माण कार्य एक निरंतर बहस का केंद्र बना हुआ है, जहां जल संसाधन प्रबंधन को लेकर भविष्य में बड़े खतरों की आशंका जताई जा रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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