चीन ने कोचिंग माफियाओं का खेल कैसे बिगाड़ा? शिक्षा में बदलाव की पूरी कहानी विश्व 3 महीने पहले 74
चीन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मुनाफाखोर कोचिंग सेंटरों पर सख्त लगाम लगाई और गाओकाओ जैसी पारदर्शी प्रवेश परीक्षाओं को मजबूती दी। आज चीन इस बदलाव के चलते एक वैश्विक शिक्षा शक्ति के रूप में उभरा है।

कोचिंग माफिया पर चीन का कड़ा प्रहार

दो दशक पहले की स्थिति पर गौर करें तो चीन की शिक्षा प्रणाली भारी संकट में थी। उस दौरान छात्रों पर रट्टा मार पढ़ाई का अत्यधिक दबाव था और प्राइवेट कोचिंग माफिया का बोलबाला था। इसके कारण समाज में गहरा भेदभाव फैल रहा था और मध्यम वर्गीय परिवार शिक्षा के बढ़ते खर्चों से त्रस्त थे। इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए चीन ने एक बड़ा बदलाव किया और डबल रिडक्शन नीति लागू की। इस नीति का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाने वाले कोचिंग सेंटरों की कमर तोड़ना था, जिससे छात्रों पर से पढ़ाई का बोझ कम हो सके।

परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव

कोचिंग माफिया को नियंत्रित करने के साथ ही चीन ने अपनी प्रवेश परीक्षा प्रणाली, जिसे गाओकाओ कहा जाता है, को राष्ट्रीय सुरक्षा के समान महत्व दिया। इस परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने धोखाधड़ी के मामलों में बेहद सख्त सजा के प्रावधान किए। इसका परिणाम यह हुआ कि छात्रों का ध्यान कोचिंग की भीड़ से हटकर स्कूली शिक्षा और अपनी प्रतिभा पर केंद्रित हुआ।

शिक्षा बजट और बुनियादी ढांचे का विस्तार

सरकार ने केवल नीतियों तक ही सीमित न रहकर शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भारी निवेश किया। चीन ने अपने कुल जीडीपी का 4% हिस्सा सीधे शिक्षा पर खर्च करना शुरू किया। इस आर्थिक सहायता ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। इसके अतिरिक्त:

  • प्रोजेक्ट 211 के माध्यम से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और शोध क्षमता को वैश्विक स्तर पर ले जाने की कोशिश की गई।
  • वोकेशनल ट्रेनिंग यानी व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया गया ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कौशल भी सीख सकें।

वैश्विक शिक्षा का नया पावरहाउस

इन रणनीतिक कदमों के बाद आज चीन शिक्षा के क्षेत्र में एक ग्लोबल पावरहाउस बन चुका है। इन सुधारों का ही नतीजा है कि चीन ने अब 97% से अधिक साक्षरता दर हासिल कर ली है। आज वहां की शिक्षण संस्थाएं न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हैं, बल्कि वे छात्रों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार कर रही हैं। हालांकि, शिक्षा क्षेत्र की इन बड़ी सफलताओं के बाद अब चीन के सामने अन्य नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं, जिनसे वहां की सरकार लगातार निपटने का प्रयास कर रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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