96 मिसाइलें और अंतरिक्ष तक पैनी नजर, फिर भी चीन की DF-21D के सामने क्यों बेबस है अमेरिका का यह महाविनाशक युद्धपोत विश्व 2 घंटे पहले 2
अमेरिकी नौसेना की रीढ़ कहा जाने वाला अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर 96 मिसाइलों और अंतरिक्ष तक नजर रखने वाले एजिस रडार से लैस है, लेकिन चीन की DF-21D और रूस की जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों के आगे इसका रिएक्शन टाइम बेहद कम पड़ जाता है।

जब समंदर की लहरों को चीरता हुआ 9,500 टन का यह लौह-दानव आगे बढ़ता है, तो महासागर का पानी भी मानो कांप उठता है। नाम है अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर। अमेरिकी नौसेना का यह सबसे ताकतवर योद्धा है, जिसके पास एक-दो नहीं बल्कि 96 घातक मिसाइलें हर पल तैनात रहती हैं। इसका रडार समंदर में खड़े-खड़े अंतरिक्ष की गहराइयों में छिपे दुश्मन को भी ढूंढ निकालने की क्षमता रखता है। दुनिया इसे अजेय मानती है और अमेरिका इसे अपना सबसे बड़ा हथियार समझता है।

लेकिन प्रशांत महासागर के दूसरे छोर पर एक ऐसी चुनौती खड़ी हो चुकी है, जिसने इस ताकतवर जहाज के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चीन की धरती से दागी जाने वाली DF-21D मिसाइल, जिसे दुनिया 'कैरियर-किलर' के नाम से जानती है। जब यह हाइपरसोनिक हथियार आवाज की रफ्तार से पांच गुना तेज गति से आगे बढ़ता है, तो पलक झपकने तक का वक्त नहीं मिलता। अंतरिक्ष तक की परछाईं पकड़ लेने वाला अर्ली बर्क का शक्तिशाली एजिस रडार भी इस रफ्तार के सामने लगभग सुन्न पड़ जाता है। स्क्रीन पर खतरे का अलार्म बजने तक मौत सिर पर पहुंच चुकी होती है।

अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर की मुख्य खूबियां

  • अल्ट्रा-एडवांस एजिस कॉम्बैट सिस्टम: इसका सबसे प्रमुख हथियार इसका एजिस रडार सिस्टम है, जो एक साथ सैकड़ों हवाई खतरों यानी मिसाइलों, फाइटर जेट्स और ड्रोन्स को ट्रैक कर उन पर निशाना साध सकता है।
  • मल्टी-मिशन क्षमता: यह जहाज एक ही समय में हवा, सतह और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का सामना कर सकता है।
  • स्टील्थ और सुरक्षा: रडार की पकड़ से बचने के लिए इसके डिजाइन में एंगल्ड सरफेस (स्टील्थ शेप) का इस्तेमाल किया गया है। इसका पूरा ढांचा स्टील का बना है और इसे केवलार (Kevlar) आर्मर से सुरक्षित किया गया है।
  • अपग्रेडेशन: अमेरिकी नौसेना ने समय के साथ इसके अलग-अलग संस्करण विकसित किए हैं, जिन्हें Flight I, Flight II, Flight IIA और सबसे आधुनिक Flight III कहा जाता है।

पेलोड और हथियारों की ताकत

इस जहाज की सबसे बड़ी ताकत इसका VLS यानी वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम है, जो किसी भी दिशा में मिसाइलें दाग सकता है।

  • मार्क 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (Mk 41 VLS): जहाज के वेरिएंट के अनुसार इनमें 90 से 96 VLS सेल्स होते हैं, जिनमें ये घातक मिसाइलें लोड की जाती हैं:
  • टॉमहॉक: लंबी दूरी तक जमीन पर सटीक हमला करने वाली क्रूज मिसाइल।
  • स्टैंडर्ड मिसाइल-2/3/6 (SM-2, SM-3, SM-6): हवाई खतरों और यहां तक कि अंतरिक्ष में मौजूद बैलिस्टिक मिसाइलों व सैटेलाइट्स को मार गिराने के लिए।
  • ESSM (Evolved SeaSparrow Missile): कम दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए।
  • एंटी-सबमरीन हथियार: इसमें ASROC यानी एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और 2 ट्रिपल टॉरपीडो ट्यूब्स (Mk 46/54 टॉरपीडो) होती हैं।
  • आर्टिलरी गन: मुख्य डेक पर एक 5-इंच (127 mm) Mk 45 नेवल गन लगी होती है, जो जमीन और समुद्र पर गोले बरसाती है।
  • क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS): आखिरी सुरक्षा कवच के रूप में इसमें Phalanx CIWS (20mm गैटलिंग गन) या सी-रैम (SeaRAM) सिस्टम होता है, जो आने वाली मिसाइलों पर प्रति मिनट हजारों गोलियां दागता है।
  • विमान: Flight IIA और Flight III वेरिएंट्स में दो MH-60R सीहॉक एंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टर्स के लिए हैंगर और डेक मौजूद रहता है।

रेंज, आकार और रफ्तार

  • विस्थापन: लगभग 8,300 टन (Flight I) से लेकर 9,500+ टन (Flight III) तक।
  • लंबाई: 510 फीट यानी 155 मीटर।
  • रफ्तार: इसकी टॉप स्पीड 30 नॉट से अधिक (56+ किमी/घंटा) है।
  • प्रोपल्शन: इसमें 4 जनरल इलेक्ट्रिक LM2500 गैस टरबाइन इंजन लगे हैं, जो कुल मिलाकर 100,000 हॉर्सपावर पैदा करते हैं।
  • रेंज: 20 नॉट (37 किमी/घंटा) की क्रूज़िंग स्पीड पर इसकी मारक रेंज करीब 4,400 नॉटिकल मील (8,100 किलोमीटर) है। यानी यह बिना ईंधन भरे आधे महासागर को पार कर सकता है।

सामरिक विश्लेषण

ताकत: अर्ली बर्क की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहुमुखी क्षमता है। इसे किसी विमानवाहक पोत की सुरक्षा के लिए तैनात किया जा सकता है या यह अकेले ही किसी छोटे देश की नौसेना को तबाह करने का दम रखता है। इसका एजिस नेटवर्क अमेरिकी उपग्रहों और फाइटर जेट्स से सीधे डेटा साझा कर सकता है।

कमजोरी: इसकी सबसे बड़ी सीमा हाइपरसोनिक मिसाइलों, जैसे चीन की DF-21D या रूस की जिरकॉन, के खिलाफ प्रतिक्रिया का बेहद कम समय है। हालांकि नए Flight III वेरिएंट में लगा AN/SPY-6 रडार विशेष रूप से इसी कमी को दूर करने और हाइपरसोनिक खतरों को पहले भांपने के लिए डिजाइन किया गया है।

सवाल-जवाब

क्या अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर परमाणु ऊर्जा से चलता है?

नहीं, यह परमाणु ऊर्जा से नहीं चलता। इसमें चार शक्तिशाली गैस टरबाइन इंजन लगे हैं, जो इसे बेहद तेज गति और त्वरित पैंतरेबाजी की क्षमता देते हैं।

क्या अर्ली बर्क क्लास भारतीय नौसेना के पास भी है?

नहीं, यह विशेष रूप से अमेरिकी नौसेना के लिए बनाया गया जहाज है और इसके कुछ वेपन सिस्टम वेरिएंट्स अमेरिकी सहयोगियों जैसे जापान और दक्षिण कोरिया के जहाजों में इस्तेमाल होते हैं। भारत के पास अपने स्वदेशी डिस्ट्रॉयर हैं, जैसे 'विशाखापत्तनम-क्लास' और 'कोलकाता-क्लास'।

क्या यह जहाज दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरिक्ष में मार गिरा सकता है?

हां, एजिस कॉम्बैट सिस्टम और SM-3 मिसाइल से लैस अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर यानी अंतरिक्ष की सीमा पर भी दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की अद्भुत क्षमता रखता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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