इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना: चीन के इस अपार्टमेंट की छत पर दौड़ती हैं कारें, जानिए क्या है माजरा विश्व एक महीने पहले 50
चीन के गुइयांग शहर में एक ऐसा रिहायशी इलाका है, जिसे शुइकोउसी ब्रिज के नीचे बसाया गया है। यहां की इमारतों के ठीक ऊपर से गाड़ियां गुजरती हैं, जिसके कारण लोग इसे अनोखा जीवनशैली का हिस्सा मान चुके हैं।

इंजीनियरिंग का एक अद्भुत कारनामा

दुनिया भर में इंजीनियरिंग के कई ऐसे बेहतरीन उदाहरण मौजूद हैं, जिन्हें देखकर इंसान दंग रह जाता है। विशेष रूप से जब चीन की बात आती है, तो वहां की वास्तुकला और निर्माण कार्य हमेशा चर्चा का विषय बने रहते हैं। चीन के इंजीनियर अक्सर ऐसी समस्याओं का समाधान निकाल लेते हैं, जो सामान्य लोगों की कल्पना से परे होती हैं। अगर किसी निर्माण कार्य के बीच में कोई इमारत आ जाती है, तो उसे हटाने के बजाय वे कुछ ऐसा करते हैं जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन जाता है। ऐसी ही एक अनोखी कहानी चीन के गुइयांग शहर से सामने आई है, जहां शुइकोउसी ब्रिज के नीचे बनी आवासीय इमारतें लोगों को हैरान कर रही हैं।

साल 1997 में हुई थी पुल की शुरुआत

इस चर्चित पुल का निर्माण कार्य साल 1997 में पूरा किया गया था। उस दौर में शहर में सस्ती आवासीय भूमि की काफी किल्लत थी। स्थानीय प्रशासन ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। प्रशासन ने तय किया कि पुल के नीचे मौजूद खाली स्थान का उपयोग आम लोगों के रहने के लिए किया जाए। पुल के निर्माण के करीब दो साल बाद यानी साल 1999 में, पुल के नीचे लगभग 10 आवासीय भवनों का निर्माण कार्य संपन्न हुआ। धीरे-धीरे इन इमारतों का दायरा बढ़ता गया और वहां और भी भवन जोड़ दिए गए, जिससे यह जगह एक बड़े रिहायशी परिसर में तब्दील हो गई।

क्यों चुनी गई पुल के नीचे की जगह?

इन इमारतों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य कम आय वाले परिवारों को शहर के भीतर बेहद सस्ता घर उपलब्ध कराना था। इसके अलावा, उन लोगों को जगह देना भी मकसद था जिन्हें पुनर्वास की सख्त जरूरत थी। पुल के नीचे की बची हुई खाली जमीनों का इस्तेमाल करके और भी इमारतें खड़ी कर दी गईं। समय के साथ यह जगह हजारों लोगों का आशियाना बन गई। हालांकि, पुल के नीचे रहना आसान नहीं था। छत के ठीक ऊपर से लगातार वाहनों का गुजरना, वाहनों का शोर और हर समय महसूस होने वाला कंपन वहां रहने वालों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया।

शोर और कंपन के बीच जिंदगी का सफर

वहां रहने वाले लोग शुरुआत में इन मुश्किलों से काफी परेशान रहे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को इस ढलते माहौल में ढाल लिया। निवासियों का मानना है कि शहर के केंद्र के इतना करीब होने और सस्ते किराए के कारण वे इन असुविधाओं के साथ समझौता करने को तैयार हैं। उन्हें ऐसा लगता है जैसे वे किसी झूलते हुए घर में रह रहे हों। हालांकि, निवासियों की कुछ समस्याओं को कम करने के लिए पुल पर भारी ट्रकों और बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी गई है। इससे शोर और कंपन के स्तर में थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन इलाका पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। धूल और वाहनों की आवाज आज भी वहां के जीवन का एक कड़वा सच है, जिसे लोग अपनी मजबूरी या जरूरत के चलते स्वीकार कर चुके हैं।

चीन की अनोखी शहरी नियोजन कला

चीन के लिए इस तरह के प्रयोग कोई पहली बार नहीं हैं। इससे पहले भी चीन अपने अनोखे शहरी विकास के मॉडलों के लिए पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर चुका है। चोंगकिंग शहर में बनी वह मेट्रो लाइन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो सीधे एक बहुमंजिला इमारत के बीच से होकर गुजरती है। शुइकोउसी ब्रिज के नीचे बसा यह मोहल्ला भी उसी रचनात्मक शहरी योजना का एक जीता-जागता प्रमाण है। ये इमारतें यह दिखाती हैं कि कैसे सीमित संसाधनों के बीच जगह की कमी को पूरा करने के लिए चीन के इंजीनियरों ने इंजीनियरिंग और व्यावहारिकता का एक अजीबोगरीब तालमेल बिठाया है। आज भले ही वहां रहने वाले लोग तमाम चुनौतियों से जूझते हों, लेकिन शहर के बीचों-बीच सस्ती छत पाने की चाहत उन्हें इन इमारतों का निवासी बनाए रखती है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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