हिमाचल प्रदेश: चम्बा में 3 महीने भी नहीं टिक पाया सुरक्षा डंगा, रावी नदी में समाने का खतरा हिमाचल प्रदेश 2 महीने पहले 56
हिमाचल प्रदेश के चम्बा में शीतला फ्लाईओवर पुल के पास बना सुरक्षा डंगा पहली ही बरसात में धंस गया है, जिससे पुल की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। निर्माण की खराब गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और प्रशासन से तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है।

पुल की सुरक्षा पर मंडराया गंभीर संकट

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला मुख्यालय के निकट स्थित शीतला फ्लाईओवर पुल पर इन दिनों भारी खतरा मंडरा रहा है। रावी नदी का जलस्तर बढ़ने और उसके तेज बहाव के कारण पुल के पास बना सुरक्षा डंगा पूरी तरह से धंस गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सुरक्षा डंगे का निर्माण कार्य मात्र तीन महीने पहले ही पूरा किया गया था। पहली ही भारी बारिश के दौरान इसके क्षतिग्रस्त हो जाने से विभाग द्वारा किए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर अब बड़े सवाल उठने लगे हैं।

गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित ठेकेदार ने पुल की सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। लोगों का सीधा आरोप है कि सुरक्षा दीवार यानी डंगे को मजबूत बनाने के बजाय उसमें निर्माण सामग्री के नाम पर मलबा भर दिया गया। यही कारण है कि यह दीवार पहली ही बरसात का दबाव झेलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में सुरक्षा दीवार गिरी हो, इससे पहले भी पुरानी रिटेनिंग वॉल गिर चुकी थी, जिसके बाद इस नए डंगे का निर्माण किया गया था। अब नया डंगा भी ध्वस्त हो जाने से सरकारी धन की बर्बादी और निर्माण कार्य में लापरवाही का मामला साफ तौर पर सामने आया है।

मिंजर मेला और मणिमहेश यात्रा पर असर

यह स्थिति इसलिए भी बेहद चिंताजनक है क्योंकि आने वाले दिनों में चम्बा में कई महत्वपूर्ण आयोजन होने वाले हैं। आगामी 26 जुलाई से अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला शुरू होने वाला है, जिसमें पूरे भारतवर्ष से हजारों की संख्या में व्यापारी और पर्यटक चम्बा आते हैं। इसके ठीक बाद अगले महीने से पवित्र मणिमहेश यात्रा का भी शुभारंभ होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजरते हैं। यदि समय रहते इस सुरक्षा डंगे की मरम्मत नहीं की गई और रावी नदी का कटाव जारी रहा, तो शीतला फ्लाईओवर पुल को भारी नुकसान हो सकता है। यह न केवल मुख्य मार्ग को बाधित करेगा, बल्कि यात्रा के दौरान जाम और हादसों का कारण भी बन सकता है।

प्रशासन से की गई स्थायी समाधान की मांग

शीतला फ्लाईओवर पुल के साथ-साथ यहाँ स्थित शीतला मंदिर और आसपास के रिहायशी इलाकों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो गया है। लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है, जिससे पुल की नींव कमजोर पड़ सकती है। स्थानीय लोग अब लगातार प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं कि वे केवल दिखावटी मरम्मत करने के बजाय इस बार मजबूत रिटेनिंग वॉल या कोई अन्य स्थायी सुरक्षा उपाय करें। वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद भारी वाहनों और यात्रियों का दबाव मुख्य मार्ग पर अधिक रहता है, ऐसे में प्रशासन के पास अब कोई और विकल्प नहीं बचा है कि वह इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच करवाए और तत्काल प्रभाव से सुरक्षा कार्य शुरू करे।

संभावित दुर्घटना का डर

पांगी घाटी जैसे क्षेत्रों में पहले भी लैंडस्लाइड के कारण दुखद हादसे हो चुके हैं जिनमें जनहानि हुई है, इसलिए चम्बा के लोग किसी भी बड़ी अनहोनी का इंतजार नहीं करना चाहते। लोगों का साफ कहना है कि अगर विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो आगामी यात्रा सीजन के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। शीतला पुल केवल एक संरचना नहीं, बल्कि चम्बा की जीवनरेखा है, जिसका सुरक्षित रहना स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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