बुरहानपुर की अनोखी तोता-मैना दरगाह: प्रेम की अटूट निशानी जहां संतान प्राप्ति के लिए उमड़ती है भीड़ मध्य प्रदेश एक महीने पहले 76
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित तोता-मैना दरगाह न केवल प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह स्थान अपनी चमत्कारी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है जहां लोग संतान प्राप्ति की मुराद लेकर आते हैं।

प्रेम की अनोखी दास्तान

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला अपनी ऐतिहासिक विरासतों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ स्थित तोता-मैना दरगाह एक ऐसी जगह है जो लोगों को अपनी ओर खींचती है। यह दरगाह शहर से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर आजाद नगर इलाके में स्थित है। इस स्थान से जुड़ी एक बेहद भावुक और दिलचस्प कहानी है। इतिहासकारों के अनुसार, बरसों पहले एक तोता और एक मैना के बीच गहरा लगाव था। जब इन दोनों पक्षियों की मृत्यु हुई, तब उनके प्रति प्रेम और संवेदना व्यक्त करने के लिए उसी स्थान पर उनकी कब्र बना दी गई, जिसे आज लोग तोता-मैना दरगाह के नाम से जानते हैं।

प्रेमियों का आकर्षण और संतान प्राप्ति की मन्नत

इस दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आज भी यह स्थल प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है। प्रेमी जोड़े बड़ी संख्या में यहाँ अपनी दुआएं मांगने और मन्नतें पूरी करने आते हैं। स्थानीय लोगों के साथ ही दूर-दराज के पर्यटक भी इस जगह की मान्यता पर अटूट विश्वास रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर यहाँ सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद भक्त यहाँ आकर विशेष रूप से 'सिरनी' का प्रसाद चढ़ाते हैं।

इतिहासकार की नजर में दरगाह का महत्व

इतिहासकार कमरुद्दीन फलक बताते हैं कि बुरहानपुर एक अत्यंत प्राचीन शहर है, जो अपनी विविध धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विख्यात है। यहाँ बड़ी संख्या में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च मौजूद हैं, जिनमें से हर एक के पीछे कोई न कोई ऐतिहासिक कहानी छिपी है। तोता-मैना दरगाह को प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। कमरुद्दीन फलक के अनुसार, यह दरगाह काफी प्राचीन है और यहाँ की प्रसिद्धि देश-विदेश में फैली हुई है। यही कारण है कि यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बनी रहती है।

पक्षियों का बसेरा और विशेष आयोजन

इस दरगाह का वातावरण भी बेहद सुकून देने वाला है। चूंकि यह स्थल पक्षियों की याद में बना है, इसलिए यहाँ के आसपास के पेड़ों और प्रांगण में बड़ी संख्या में पक्षी चहचहाते हुए नजर आते हैं। श्रद्धालु इन पक्षियों को दाना-पानी देने का कार्य भी करते हैं, जो इस स्थान की सादगी को और बढ़ाता है। केवल मन्नतें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए भी लोग यहाँ आते हैं। दरगाह पर चद्दर चढ़ाने की रस्म अदा की जाती है और समय-समय पर बड़े स्तर पर लंगर का आयोजन भी किया जाता है। इस वार्षिक आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग बुरहानपुर पहुंचते हैं, जिससे आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश और अधिक प्रगाढ़ होता है। यह स्थान आज बुरहानपुर की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जहां लोग आस्था और प्रेम को एक साथ महसूस करते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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