क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल के बाद बड़ी गिरावट, एक हफ्ते में 16 प्रतिशत सस्ता हुआ कच्चा तेल व्यापार 20 मिनट पहले 2
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे ब्रेंट क्रूड का भाव 94 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है। इस गिरावट के पीछे अमेरिका के चुनाव नतीजे और मध्य पूर्व से आपूर्ति में सुधार प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

कच्चे तेल में भारी गिरावट से बाजार में हलचल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में काफी तेज गिरावट का रुख देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार टूट रहे क्रूड ऑयल के दाम अब 94 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे आ गए हैं। महज एक सप्ताह के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 16 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के परिणाम और ईरान को लेकर चल रहे तनावपूर्ण हालात में नरमी की उम्मीदें प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। इसके अतिरिक्त मध्य पूर्व क्षेत्र से तेल की वैश्विक आपूर्ति में हुए सुधार ने भी कीमतों पर काफी दबाव बनाया है।

ब्रेंट क्रूड का भाव 94 डॉलर के नीचे

गुरुवार के आंकड़ों पर गौर करें तो ब्रेंट क्रूड फ्यूचर में 97 सेंट यानी 1.03 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई, जिसके बाद यह 93.65 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर आ गया। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड की कीमतों में 1.14 डॉलर की गिरावट आई है, जो कि 1.29 प्रतिशत का नुकसान है। इसके बाद इसका भाव 86.98 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो गया। गौर करने वाली बात यह है कि इससे ठीक पहले के कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में 8 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। 31 अगस्त के बाद से यह कच्चे तेल की कीमतों का सबसे निचला स्तर है।

अमेरिकी चुनाव परिणामों का असर

तेल की कीमतों में आई इस तेज गिरावट का एक प्रमुख कारण अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के परिणाम हैं। इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इस राजनीतिक बदलाव का सीधा असर यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाना अब चुनौतीपूर्ण हो सकता है। निवेशकों के बीच यह धारणा प्रबल है कि अमेरिकी कांग्रेस का बढ़ता दबाव राष्ट्रपति ट्रंप को कूटनीतिक बातचीत और शांति का रास्ता चुनने पर मजबूर करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल ईरान पर हमले की उनकी कोई तत्काल योजना नहीं है, जिससे बाजार में युद्ध के जोखिम की आशंका कम हो गई है।

सप्लाई में सुधार से कीमतों में कमी

बाजार में कीमतों के घटने का दूसरा बड़ा कारक मध्य पूर्व से तेल की सुचारू सप्लाई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से अब कच्चे तेल का परिवहन युद्ध पूर्व की स्थिति के काफी करीब पहुंच गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया में लागत पहले की तुलना में अधिक आ रही है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी देशों से आपूर्ति बहाल होने के चलते वैश्विक बाजार में मांग की तुलना में तेल की उपलब्धता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में रोजाना 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में आने का अनुमान है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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