खेती में नई क्रांति: मचान और मल्चिंग तकनीक से किसान ने कमाया 1 लाख रुपये का मुनाफा झारखंड 3 घंटे पहले 4
बोकारो के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर मचान और मल्चिंग विधि अपनाकर झींगा की बंपर पैदावार ली है, जिससे उन्हें बंपर कमाई हो रही है।

बोकारो में खेती की नई मिसाल

बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड स्थित भंगाट गांव के रहने वाले अरुण महतो ने आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल कर खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। आमतौर पर लोग पारंपरिक तरीके से सब्जियां उगाते हैं, लेकिन अरुण ने मचान और मल्चिंग विधि को अपनाकर अपनी किस्मत बदल ली है। एक एकड़ जमीन पर झींगा यानी तोरई की खेती करके वे आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

खेती में मिली विरासत और नई राह

अरुण महतो का कहना है कि उन्हें खेती-बाड़ी का गुण अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। अपने माता-पिता और दादा-दादी से प्रेरित होकर उन्होंने खेती को ही अपना मुख्य पेशा बनाया और अपनी आय बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को आजमाने का फैसला किया। आज वे अपनी मेहनत से न केवल बेहतर उपज प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि बाजार में अपनी सब्जियों की अच्छी मांग भी सुनिश्चित कर पा रहे हैं।

मचान और मल्चिंग तकनीक का कमाल

किसान अरुण ने बताया कि उन्होंने अगस्त महीने में करीब एक एकड़ भूमि पर झींगा की फसल लगाई थी। इस तकनीक के दो बड़े फायदे हैं। पहला, मचान बनाने से पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जिससे फल जमीन के संपर्क में आकर सड़ते नहीं हैं। दूसरा, मल्चिंग करने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार पर भी नियंत्रण रहता है। इस उन्नत विधि से पौधों का विकास तेजी से होता है और पैदावार में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है।

कम समय में अधिक उत्पादन

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि झींगा की फसल केवल 30 से 35 दिनों में ही तैयार हो जाती है। इसके बाद किसान अगले डेढ़ महीने तक लगातार फलों की तोड़ाई कर सकते हैं, जिससे नियमित आमदनी का जरिया बना रहता है। अरुण के अनुसार, एक एकड़ खेत से लगभग 50 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जो सामान्य पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक है।

आंकड़ों का गणित: लागत और मुनाफा

खेती के इस मॉडल में वित्तीय प्रबंधन काफी सटीक है। एक एकड़ में झींगा की खेती पर कुल 50 हजार रुपये की लागत आती है। यदि बाजार भाव की बात करें, तो झींगा की औसतन कीमत 30 रुपये प्रति किलो रहती है। इस हिसाब से 50 क्विंटल यानी 5000 किलो पैदावार की बिक्री करने पर किसान को लगभग 1.50 लाख रुपये की सकल आमदनी होती है। यदि कुल खर्च 50 हजार रुपये को इसमें से घटा दिया जाए, तो किसान को सीधे तौर पर 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है।

फसल को कीटों से बचाने की सलाह

अनुभवी किसान अरुण महतो ने अन्य साथियों को सचेत करते हुए कहा कि झींगा की फसल में कभी-कभी पत्तियों के मुड़ने या उन पर पीलापन आने जैसी समस्या देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है। उन्होंने सलाह दी है कि बिना उचित जानकारी या विशेषज्ञ की राय के किसी भी कीटनाशक का प्रयोग न करें। कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर सही दवा का छिड़काव करने से फसल को बीमारियों से बचाया जा सकता है और उत्पादन की गुणवत्ता बरकरार रहती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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