भारत
3 घंटे पहले
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विचारों
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सम्मान और उसकी गरिमा को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। भाजपा ने 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए उस निर्णय का तीखा विरोध किया है, जिसमें उन्होंने साल 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव को फिर से दोहराते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पदों के गायन की सीमा तय की है। भाजपा का स्पष्ट मानना है कि 'वंदे मातरम' केवल कुछ साधारण शब्द नहीं हैं, बल्कि यह हमारे स्वाधीनता संग्राम का मूल मंत्र, भारत माता के प्रति अगाध श्रद्धा की अभिव्यक्ति और देश की राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसी गौरवशाली विरासत की रक्षा के लिए भाजपा ने एक कड़ा संकल्प लिया है।
वंदे मातरम के अपमान के विरुद्ध भाजपा का कड़ा संकल्प
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के चलते देश के ऐतिहासिक प्रतीकों के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। पार्टी इस बात पर बल देती है कि कांग्रेस का यह फैसला राष्ट्रीय चेतना पर आघात करने जैसा है। इसके विरोध में और पूरे गीत के सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भाजपा ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत देश के नागरिकों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को इस राष्ट्रगीत के महत्व से परिचित कराया जाएगा।
प्रस्ताव के 10 प्रमुख बिंदु: संपूर्ण गीत के सम्मान की रक्षा
भाजपा द्वारा पारित किए गए इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव के मुख्य 10 बिंदु निम्नलिखित हैं, जिनमें इस राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व को रेखांकित किया गया है:
- कांग्रेस के फैसले का पुरजोर विरोध: भाजपा 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोबारा लागू करने और 'वंदे मातरम' के गायन को मात्र दो पदों तक सीमित करने के निर्णय की कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है और इसका कड़ा विरोध करती रहेगी।
- पूर्ण गीत की गरिमा की रक्षा: पार्टी पूर्ण वंदे मातरम के मान-सम्मान, उसकी ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा इसे भारत का गौरवशाली राष्ट्रीय गीत और स्वाधीनता संग्राम की अमर धरोहर मानती है।
- संवैधानिक और कानूनी स्थिति का समर्थन: साल 1950 में संविधान सभा द्वारा की गई घोषणा और वर्ष 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को 'जन गण मन' के समान ही वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने के फैसले की भाजपा पूरी दृढ़ता से पुष्टि करती है।
- तुष्टीकरण की राजनीति का विरोध: राष्ट्रीय गीत को किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक दबाव, संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति अथवा राजनीतिक तुष्टीकरण के अधीन लाने के हर एक प्रयास का भाजपा डटकर विरोध करेगी।
- संवैधानिक संस्थाओं की सर्वोपरिता: भाजपा कांग्रेस को यह याद दिलाना चाहती है कि उसकी कार्यसमिति का कोई भी राजनीतिक प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं और संसद द्वारा पारित कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। साल 1937 का राजनीतिक समझौता कभी भी 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 के संसदीय कानून का स्थान नहीं ले सकता।
- ऐतिहासिक सच को सामने लाना: पार्टी देश की जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को उजागर करेगी, जिसके तहत 'वंदे मातरम' के गायन को सीमित करने की कोशिशें की गई थीं। इसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां और उसके बाद बढ़ी सांप्रदायिक व अलगाववादी राजनीति के सच को जनता के समक्ष रखा जाएगा।
- महात्मा गांधी के विचारों का प्रसार: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक वक्तव्य को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, जिसमें उन्होंने 'वंदे मातरम' को एक सशक्त "साम्राज्यवाद-विरोधी नारा" और "शुद्धतम राष्ट्रीय भावना" का प्रतीक बताया था।
- देशव्यापी जनजागरण अभियान: भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से देश के कोने-कोने में एक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 'वंदे मातरम' के गौरवशाली इतिहास, इसके गहरे अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और इसकी विरासत से देशवासियों को अवगत कराया जाएगा।
- युवा पीढ़ी में जागरूकता: देश की नई और युवा पीढ़ी के बीच विशेष रूप से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छह पदों वाले इस पूरे राष्ट्रीय गीत और इसके गौरवमयी इतिहास को भुलाया न जाए। युवा समझ सकें कि इस गीत के साथ देश के संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी यादें जुड़ी हैं।
- समझौते को पूरी तरह से नकारना: राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए राष्ट्रीय गीत के सम्मान और विरासत के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मुद्दा केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है, बल्कि यह देश के मान-सम्मान और उन अनगिनत देशभक्तों के बलिदान का विषय है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया था।
ब्रिटिश हुकूमत के डर से लेकर विकसित भारत की हुंकार तक
भारतीय जनता पार्टी ने देश की जनता से अपील की है कि वे उस दौर को याद करें जब 'वंदे मातरम' के नारों से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई थी। अंग्रेज हुकूमत इन शब्दों से इतनी भयभीत थी कि उन्होंने इसे दबाने की हर मुमकिन कोशिश की, क्योंकि इस गीत ने भारतीयों के भीतर आजादी की अलख जगाई थी। कई पीढ़ियों के देशभक्तों ने इसे अपने संघर्ष और राष्ट्रगौरव का मूल मंत्र माना। इस महान विरासत को आज की संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के तराजू में तौला नहीं जा सकता। साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ था, तब देश का जयघोष 'वंदे मातरम' था। अब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में साल 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प का महाघोष भी 'वंदे मातरम' ही होगा।
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