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2 घंटे पहले
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बीजेपी का बड़ा आरोप
भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा का पेपर लीक किया गया है। पार्टी का दावा है कि इस पूरे घोटाले में प्रदेश सरकार के कई मंत्री और प्रभावशाली कांग्रेस नेता शामिल हैं। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि डीके शिवकुमार और अन्य मंत्री इस बड़े घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए चुनाव आयोग पर निराधार निशाने साध रहे हैं। बीजेपी के अनुसार, पेपर को 30 से 40 लाख रुपये जैसी मोटी रकम लेकर बेचा गया था।
छात्रों से मांगी गई थी 80 लाख रुपये की मोटी रकम
इस मामले की तह तक जाएं तो पता चलता है कि कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा इसी साल 8 और 9 जनवरी को आयोजित की गई थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से महज एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था। एस. मंजूनाथ नाम के एक व्यक्ति ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। जांच में खुलासा हुआ कि ज्ञानेंद्र कुमार नाम के शख्स ने परीक्षा के प्रश्नों को पेन ड्राइव में हासिल कर लिया था। इसके बाद एक बिचौलिए बसवराज कन्नाले को काम सौंपा गया कि वह उन छात्रों से संपर्क करे जो परीक्षा में शामिल होने वाले थे। शुरुआत में इन छात्रों से 80 लाख रुपये की भारी-भरकम मांग की गई, लेकिन अंत में सौदा 30 से 40 लाख रुपये में तय हुआ।
1 करोड़ 52 लाख रुपये की वसूली और रिजॉर्ट में सेटिंग
मामले के खुलासे के अनुसार, सबसे पहले 11 छात्रों ने मिलकर कुल 1 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि बिचौलियों को सौंपी। बाकी बची हुई रकम की गारंटी के लिए पोस्ट डेटेड चेक लिए गए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस वसूली गई रकम में से 1 करोड़ 30 लाख रुपये ज्ञानेंद्र कुमार को दिए गए। इस घूस की रकम से ज्ञानेंद्र कुमार ने कीमती जेवरात खरीदे, जिसमें 22 लाख रुपये का एक डायमंड नेकलेस भी शामिल है। इतना ही नहीं, बसवराज ने बेंगलुरु शहर के बाहर एक रिजॉर्ट बुक किया और उन सभी उम्मीदवारों को वहां ठहराया गया। रिजॉर्ट में ही उन्हें लीक हुए प्रश्नपत्रों के उत्तर रटाए गए। इसके बाद जब 17 जुलाई को परिणाम घोषित हुआ, तो उन सभी उम्मीदवारों का चयन हो गया जिन्होंने पैसे दिए थे। मामला सामने आने पर कर्नाटक सरकार ने इसकी जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी थी।
ईडी (ED) की रेड और एसआईटी (SIT) का गठन
बाद में इस मामले में ईडी (ED) की भी एंट्री हुई। ईडी की छापेमारी में कई अहम सबूत हाथ लगे और पेपर खरीदकर परीक्षा पास करने वाले 11 छात्रों में से 10 छात्र अब सरकारी गवाह (एप्रूवर) बन गए हैं। अब कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है। संबित पात्रा ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक को रिश्वत का एटीएम (ATM) बना दिया है और सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस मामले को दबाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
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