छत्तीसगढ़
15 घंटे पहले
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भरण-पोषण विवाद में पति को मिला बड़ा कानूनी अधिकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण यानी गुजारा भत्ता से जुड़े कानूनी विवादों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण के मुकदमों के दौरान पति को अपनी पत्नी की आय के स्रोतों और संपत्ति के विवरण पर जिरह यानी क्रॉस एग्जामिनेशन करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को खारिज करते हुए कहा कि न्याय के सिद्धांत के तहत निष्पक्ष सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को समान अवसर देना अनिवार्य है।
क्या था पूरा मामला और विवाद की जड़
यह मामला रायपुर की एक महिला से संबंधित है, जिसने अपने पति के खिलाफ दुर्ग स्थित फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण का आवेदन दायर किया था। कानूनी कार्यवाही के दौरान, महिला ने अपनी आर्थिक स्थिति और संपत्ति के बारे में जानकारी देने के लिए एक शपथ पत्र यानी एफिडेविट कोर्ट में जमा किया था। जब मामले की सुनवाई आगे बढ़ी, तो पति ने शपथ पत्र में दी गई आय संबंधी जानकारी पर सवाल उठाने और प्रति-परीक्षण करने की इच्छा जताई।
फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द
दुर्ग फैमिली कोर्ट ने 3 अगस्त को एक आदेश पारित करते हुए पति को पत्नी की आय और संपत्तियों से जुड़े बिंदुओं पर जिरह करने से रोक दिया था। फैमिली कोर्ट के इस फैसले के बाद पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए यह तर्क दिया गया कि यदि उन्हें शपथ पत्र में दर्ज तथ्यों पर सवाल पूछने का मौका नहीं दिया गया, तो वे अदालत के सामने अपना बचाव प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे।
सुनवाई के लिए दी गई अगली तारीख
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इस पर विस्तृत सुनवाई की। अदालत ने दुर्ग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें जिरह पर रोक लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को यह निर्देश दिया है कि 11 सितंबर को निर्धारित सुनवाई के दौरान पति को पत्नी की आय के साक्ष्यों पर जिरह करने की पूरी अनुमति दी जाए।
सुनवाई के दौरान बरती जाए सावधानी
जिरह की अनुमति देने के साथ ही हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण हिदायत भी दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिरह के दौरान सवालों को बार-बार दोहराया नहीं जाना चाहिए, ताकि कानूनी प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी न हो। हाईकोर्ट ने जोर दिया कि जैसे पति की आय पर पत्नी सवाल उठा सकती है, वैसे ही पत्नी की आय पर भी पति को सवाल पूछने का समान कानूनी हक है।
फैसले का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह निर्णय भरण-पोषण के मुकदमों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम है। यह फैसला सुनिश्चित करेगा कि आय और संपत्ति की वास्तविक स्थिति कोर्ट के सामने आ सके, जिससे न्याय का पलड़ा किसी एक पक्ष की ओर न झुके। निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय आने वाले समय में भरण-पोषण से जुड़े अन्य विवादों में भी एक नजीर का काम करेगा।
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