बिहार के मॉडल स्कूलों का रंग भगवा होने पर गरमाई सियासत, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने किया बचाव बिहार एक महीने पहले 43
बिहार में 551 मॉडल स्कूलों का रंग भगवा करने और उनके नाम बदलने पर विवाद छिड़ गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे माता सरस्वती के रंग से जोड़ा है।

बिहार के मॉडल स्कूलों के नए रंग पर छिड़ा घमासान

बिहार में सरकार द्वारा राज्य के 551 मॉडल स्कूलों को भगवा रंग में रंगे जाने का निर्णय इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। न केवल विपक्ष इस निर्णय की कड़ी आलोचना कर रहा है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। इस विवाद के बीच बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। उन्होंने स्कूलों के रंग को भगवा किए जाने का बचाव करते हुए कहा कि, 'सरस्वती माता का रंग भी भगवा है, इसलिए स्कूलों को इस रंग में रंगा गया है।'

विपक्ष और सहयोगियों के कड़े सवाल

राज्य सरकार के इस फैसले को शिक्षा के भगवाकरण के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दल इसे एक राजनीतिक एजेंडा करार दे रहे हैं। वहीं, जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस पर असहमति जताते हुए कहा कि दीवारों का रंग बदल देने से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती है। उनका मानना है कि सरकार को रंग के बजाय शिक्षा के अधिकार और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि जिन लोगों ने अपनी जमीन दान में देकर स्कूल बनवाए थे, शिलापट्ट पर उनका नाम नीचे चले जाने से उनके पुरखों के सम्मान पर भी असर पड़ता है।

क्या था स्कूलों का पहले का स्वरूप

गौरतलब है कि इससे पहले स्कूलों के रंग को लेकर कोई ठोस सरकारी दिशा-निर्देश नहीं थे। प्रधानाध्यापक अपनी समझ और विवेक के अनुसार स्कूलों के रंग का चयन करते थे, जिसमें आमतौर पर गुलाबी, पीले या आसमानी नीले रंग का इस्तेमाल किया जाता था। पहले स्कूल अपने स्वयं के फंड से रंग-रोगन का कार्य करवाते थे, लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया शिक्षा विभाग के नियंत्रण में आ गई है।

नए निर्देशों के तहत स्कूलों की बदलती तस्वीर

शिक्षा विभाग के नए फरमान के अनुसार, सभी मॉडल स्कूलों में एकरूपता बनाए रखने के लिए अब बाहरी दीवारों को केसरिया रंग से रंगा जा रहा है। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया है कि कक्षाओं के अंदर की दीवारें सफेद रंग की होनी चाहिए और मुख्य द्वार को हल्का पीला या सुनहरा रंग दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों का नाम भी बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन कर दिया गया है।

स्कूलों के नाम बदलने पर भी नाराजगी

रंग के साथ-साथ नाम बदलने के फैसले ने भी भारी विवाद पैदा कर दिया है। जिन दानदाताओं ने अपनी जमीन स्कूलों के लिए दी थी और स्कूल उनके नाम पर थे, वे भी इस निर्णय से काफी नाराज दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, सरकार का पक्ष है कि पुराने नाम को पूरी तरह हटाया नहीं गया है, बल्कि उसके आगे सरस्वती विद्या निकेतन जोड़ दिया गया है। इन स्कूलों का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेगूसराय में एक कार्यक्रम के दौरान किया था, जिसके बाद से ही इस मामले पर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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