मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
दतिया में चुनावी सरगर्मी और कांग्रेस की नई रणनीति
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। मतदान की तारीख नजदीक आते ही कांग्रेस ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। दतिया में चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने पूरी तरह से किलाबंदी करने की योजना बनाई है। पार्टी ने एक अहम फैसला लेते हुए तय किया है कि मतदान के दिन दतिया विधानसभा की सीमाओं और प्रमुख बॉर्डर वाले इलाकों में वरिष्ठ नेताओं की सीधी तैनाती रहेगी।
निष्पक्ष चुनाव के लिए दिग्गजों की तैनाती
कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य मतदान के दौरान बाहरी लोगों के हस्तक्षेप, प्रशासनिक मशीनरी के दबाव और बूथ स्तर पर किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता को रोकना है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस ने दतिया के चारों ओर अलग-अलग सेक्टरों की जिम्मेदारी पार्टी के बड़े नेताओं को सौंप दी है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि मतदान की पूरी प्रक्रिया पर उनकी पैनी नजर रहेगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही उसे तुरंत चुनाव आयोग के समक्ष उठाया जाएगा।
किस नेता को मिली क्या जिम्मेदारी
कांग्रेस ने व्यापक सुरक्षा घेरा बनाने के लिए अपने कई कद्दावर नेताओं को अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया है। इन जिम्मेदारियों का ब्यौरा इस प्रकार है:
- दतिया से सटे डबरा क्षेत्र की निगरानी का जिम्मा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, सांसद अशोक सिंह, पूर्व मंत्री लाखन सिंह और जसवीर गुर्जर को सौंपा गया है।
- भांडेर क्षेत्र की कमान पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और विधायक फूल सिंह बरैया के हाथों में दी गई है।
- सेवढ़ा की तरफ से लगने वाली दतिया सीमा पर उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, भिंड जिला कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल भदौरिया मोर्चा संभालेंगे।
- दिनारा क्षेत्र की जिम्मेदारी जयवर्धन सिंह और केपी सिंह को दी गई है।
- झांसी की सीमा पर निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
भाजपा पर कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल पुलिस, प्रशासन और धनबल का दुरुपयोग कर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उनका तर्क है कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह क्षेत्र में एक स्थापित और जाना पहचाना चेहरा हैं, जबकि भाजपा उम्मीदवार को जनता के बीच उतनी पहचान नहीं मिल पाई है, जिसके कारण भाजपा दबाव की राजनीति का सहारा ले रही है।
भाजपा का पलटवार और चुनावी समीकरण
कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले से ही अपनी हार का पूर्वाभास हो रहा है, इसी वजह से पार्टी अभी से बहाने ढूंढने में जुट गई है। भाजपा का दावा है कि वे पूरी तरह से लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ रहे हैं और जनता विकास कार्यों के मुद्दे पर ही अपना वोट देगी।
जनता का फैसला और चुनौतियां
अब सबकी निगाहें मतदान के दिन पर टिकी हैं। दतिया का चुनावी मुकाबला केवल दो पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि कई अन्य समीकरणों के बीच भी फंसा हुआ है। एक तरफ जहां कांग्रेस के सामने आजाद पार्टी के दामोदर यादव द्वारा होने वाले वोट डायवर्जन (मतों के बंटवारे) का खतरा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा को अपने कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है, और यह उपचुनाव दतिया की जनता के विश्वास की परीक्षा साबित होगा।
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