मोहम्मद फराज की 'फिदायीन ट्रेनिंग' की तैयारी! निशाने पर थे वीआईपी नेता, ATS पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
भोपाल ATS की गिरफ्त में आए मोहम्मद फराज से पूछताछ में पता चला है कि वह फिदायीन हमले की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था और उसके निशाने पर मध्य प्रदेश समेत देश के वीआईपी व राजनेता थे। एजेंसी उसके पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क, डिजिटल सामग्री और कथित नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

मध्य प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की गिरफ्त में आए मोहम्मद फराज से पूछताछ के दौरान कई ऐसे दावे सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह फिदायीन हमले की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था और उसके निशाने पर मध्य प्रदेश समेत देश के वीआईपी तथा राजनेता थे। एजेंसी का दावा है कि उसका ब्रेनवॉश हो चुका था और वह मानव बम बनने को तैयार था।

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आरोपी कथित रूप से विदेशी कट्टरपंथी नेटवर्क के प्रभाव में था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए संचालित एक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के संपर्क में था। ATS का कहना है कि आरोपी को वैचारिक रूप से प्रभावित कर कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था।

ऑनलाइन भूमिका या बड़े नेटवर्क का हिस्सा

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की भूमिका केवल ऑनलाइन संपर्क तक सीमित थी या फिर वह किसी बड़े नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन चुका था। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर ATS ने उसके डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और विदेशी संपर्कों की गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। एजेंसी यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने अन्य युवाओं से संपर्क बनाया था और क्या उसके जरिए किसी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा था।

पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क और 'सैफुल्लाह' कोड नेम

ATS सूत्रों के अनुसार मोहम्मद फराज कथित रूप से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए एक पाकिस्तानी हैंडलर शाहिद खालिद के संपर्क में था। जांच में दावा किया गया है कि हैंडलर ने उसे 'सैफुल्लाह' नाम का कोड नेम दिया था। एजेंसी का आरोप है कि इसी पहचान के साथ वह कुछ ऑनलाइन समूहों में सक्रिय था और वैचारिक सामग्री साझा करता था।

युवाओं को जोड़ने का कथित टास्क

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी को सिर्फ खुद प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया गया, बल्कि उसे अन्य युवाओं तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। ATS यह जांच कर रही है कि उसके संपर्क में कितने लोग थे और क्या किसी स्थानीय नेटवर्क को खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी। बताया जा रहा है कि वह भोपाल में मस्जिद के पास रहते हुए युवाओं को कुरान पढ़ाता था और कई युवा उसके संपर्क में थे।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान जाने की तैयारी की जांच

पूछताछ में यह दावा भी सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर विदेश में विशेष प्रशिक्षण लेने की तैयारी कर रहा था। ATS अब यात्रा संबंधी दस्तावेज, डिजिटल चैट, वित्तीय लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि इस दावे की पुष्टि की जा सके।

डिजिटल सामग्री बनी अहम सुराग

ATS ने आरोपी के मोबाइल और अन्य उपकरणों से कई PDF फाइलें, दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जब्त की है। जांच एजेंसी का कहना है कि इनमें कुछ कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री भी शामिल है। साइबर विशेषज्ञ इन दस्तावेजों के स्रोत और प्रसार की पड़ताल कर रहे हैं।

वीआईपी टारगेट एंगल पर भी जांच

सुरक्षा एजेंसियां उन इनपुट्स की भी जांच कर रही हैं जिनमें कथित रूप से कुछ प्रमुख व्यक्तियों को निशाना बनाने की चर्चा सामने आई है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ATS का कहना है कि सभी डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

रिमांड पर पूछताछ जारी

गिरफ्तारी के बाद विशेष अदालत ने आरोपी को ATS रिमांड पर भेजा है। एजेंसी उसके विदेशी संपर्कों, ऑनलाइन गतिविधियों, संभावित सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में मामले से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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