मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना को लेकर अस्पतालों का बड़ा विरोध, बाहर लटके 'बंद' के पोस्टर मध्य प्रदेश 4 घंटे पहले 6
मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते कई अस्पतालों के बाहर योजना बंद होने के पोस्टर देखे जा रहे हैं। अस्पताल संचालक बकाया भुगतान और नई शर्तों को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

मध्य प्रदेश में अस्पतालों का विरोध

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश के कई निजी अस्पतालों ने इस सरकारी योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है और अपने अस्पतालों के बाहर स्पष्ट तौर पर 'आयुष्मान योजना बंद' के पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि उनकी मांगों को अगर 8 अक्टूबर तक नहीं माना गया, तो वे प्रदेशव्यापी स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। यह स्थिति राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

विरोध की असली वजह क्या है

आयुष्मान भारत योजना के बहिष्कार के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। एक ओर सरकार उन निजी अस्पतालों पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है जो योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। अब तक पूरे मध्य प्रदेश में 100 अस्पतालों पर और सिर्फ भोपाल में 25 अस्पतालों पर कार्रवाई की जा चुकी है। माना जा रहा है कि इस सख्त रवैये से भी अस्पताल संचालकों में भारी नाराजगी है।

दूसरी ओर, निजी अस्पताल संचालकों ने बकाया भुगतान के अटकने, NABH की अनिवार्यता और अन्य तकनीकी बाधाओं को अपनी नाराजगी का प्रमुख कारण बताया है। उनका तर्क है कि योजना के तहत किए गए इलाज के बिलों का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही प्री-ऑथराइजेशन के बाद क्लेम सेटलमेंट, TAT (टर्नअराउंड टाइम) और ऑथेंटिकेशन जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण भी उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

NABH सर्टिफिकेट और नई शर्तें

मध्य प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,953 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हुए हैं। इनमें 1,140 सरकारी और 813 निजी अस्पताल शामिल हैं। राज्य के चार प्रमुख महानगरों यानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में NABH सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया गया है। इन चारों शहरों में कुल 739 अस्पताल योजना का हिस्सा हैं, जिनमें 418 निजी अस्पताल हैं। इनमें से 328 के पास NABH सर्टिफिकेट है, जबकि 90 निजी अस्पताल अभी भी इस सर्टिफिकेट से वंचित हैं। 1 अक्टूबर 2026 से लागू की गई इन नई शर्तों ने अस्पतालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, हालांकि सरकारी अस्पतालों को इस अनिवार्यता से बाहर रखा गया है।

क्या है आयुष्मान भारत योजना के लाभ

आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों के समय आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। इसमें सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर का इलाज शामिल है। इसके अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, दवाओं की लागत, जरूरी जांच और इलाज की प्रक्रियाएं कवर होती हैं। इसमें कैंसर, डायलिसिस, न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी और ट्रॉमा जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज भी निर्धारित हेल्थ बेनिफिट पैकेज के तहत उपलब्ध है।

आगे की रणनीति और सरकारी बजट

अस्पताल संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकला, तो वे आयुष्मान योजना का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। इसके तहत प्रदेशभर के अस्पताल संचालक करीब 1,000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच करने और अपनी आवाज प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। गौर करने वाली बात है कि मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 863 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। साथ ही, योजना के अगले पांच वर्षों के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है, जिसके बावजूद वर्तमान गतिरोध ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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