Bhojpur में Bharat Tiwari का Encounter: क्या कानून के नाम पर हुई हत्या? बिहार 2 महीने पहले 86
भोजपुर के Shahpur में Bharat Tiwari के कथित एनकाउंटर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग इसे हत्या करार देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

गंभीर होते सवाल

लोकतंत्र में पुलिस की गोली अंतिम उपाय होनी चाहिए, पहली नहीं। जब किसी मुठभेड़ पर सवालों की फेहरिस्त जवाबों से लंबी हो जाए, तो एक पत्रकार और जागरूक नागरिक होने के नाते सच का साथ देना हमारा दायित्व बन जाता है। भोजपुर के Shahpur थाना क्षेत्र के Bitouli गांव के Bharat Tiwari का कथित एनकाउंटर इसी तरह के अनगिनत सवाल छोड़ गया है।

क्या यह एनकाउंटर था या मर्डर?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि Bharat Tiwari ने अपनी बातें रखने के बाद पुलिस के सामने पिस्टल फेंक दी थी, जिसका अर्थ है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। ऐसे में ये सवाल लाजमी हैं:

  • यदि Bharat Tiwari ने हथियार पुलिस को सौंप दिया था, तो उन पर गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
  • एक आत्मसमर्पण कर चुके व्यक्ति से खतरा क्या था और उन पर चार गोलियां क्यों दागी गईं?
  • Bharat Tiwari का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं था, तो फिर उन्हें किस आधार पर अपराधी मानकर ढेर कर दिया गया?

दबाव में व्यवस्था?

स्थानीय लोगों के अनुसार Bharat Tiwari समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय थे और विस्थापित परिवारों के लिए आवाज उठाते थे। पुलिस उन्हें मानसिक रूप से विक्षिप्त बता रही है, लेकिन बिना किसी साक्ष्य के किसी को पागल घोषित करने का अधिकार किसने दिया? यदि वह मानसिक रूप से बीमार थे भी, तो उन्हें इलाज की आवश्यकता थी, एनकाउंटर की नहीं। यह विडंबना है कि अपनी सुरक्षा के लिए खरीदी गई पिस्टल ही उनकी मौत का कारण बन गई।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और आक्रोश

Bharat Tiwari का परिवार पुलिस बल से जुड़ा रहा है। उनके पिता बिहार पुलिस से सिपाही के पद से सेवानिवृत्त हैं और उनकी बहन वर्तमान में बिहार पुलिस में कार्यरत हैं। उनके निधन के बाद शाहपुर के Bitouli गांव में भारी आक्रोश है और दाह संस्कार के दौरान हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी। न्याय की मांग को लेकर आरा शहर में शुक्रवार को सैकड़ों युवाओं ने कैंडल मार्च भी निकाला।

निष्पक्ष जांच की मांग

Bharat Tiwari के मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच अनिवार्य है। यदि पुलिस की कार्रवाई कानून सम्मत थी, तो साक्ष्य सामने आने चाहिए। अन्यथा, निर्दोष की मौत लोकतंत्र और कानून के शासन पर एक बड़ा प्रहार है। न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि जनता को होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप