भरत तिवारी श्राद्ध: बेटे के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, पिता बोले- सोचा था शादी का भोज दूंगा, पर... बिहार 2 महीने पहले 65
बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में उनके पैतृक गांव में आयोजित श्राद्धकर्म में 20,000 से अधिक लोग शामिल हुए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच वाली याचिका को पटना हाईकोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।

श्राद्ध में उमड़ी 20,000 लोगों की भीड़

बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यह मौका था भरत भूषण तिवारी के श्राद्धकर्म का, जो अपने कथित एनकाउंटर के बाद से ही पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस आयोजन में लोगों की भीड़ इतनी अधिक थी कि अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया था। आधिकारिक आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20,000 लोगों ने वहां पहुंचकर भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की और महाप्रसाद ग्रहण किया। भीड़ का आलम यह था कि जिस स्थान पर परिजनों ने मात्र 15,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की थी, वहां उम्मीद से कहीं अधिक संख्या में लोग पहुंच गए। इस दौरान न केवल बिहार, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग बिलौटी पहुंचे।

पिता का छलका दर्द

बेटे को अंतिम विदाई देते समय पिता काशीनाथ तिवारी पूरी तरह टूट गए। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मुझे अपने बेटे के लिए ऐसा आयोजन करना पड़ेगा। उन्होंने रोते हुए साझा किया कि उनकी इच्छा थी कि वे अपने बेटे की शादी के उपलक्ष्य में एक भव्य दावत का आयोजन करें और सभी को आमंत्रित करें, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज उन्हें बेटे की शादी के बजाय उसके श्राद्ध के लिए महाभोज करना पड़ रहा है। इस मौके पर मौजूद लोगों के बीच पुलिस प्रशासन को लेकर गहरा आक्रोश स्पष्ट दिखाई दे रहा था। गांव के लोगों और दूर-दराज से आए समर्थकों ने इस मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी और त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।

सुप्रीम कोर्ट से याचिका पर क्या आया फैसला?

इधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में इस पूरे एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया था। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज हो। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख में स्वतंत्र जांच हो। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सीधे सुनवाई करने के बजाय याचिकाकर्ता को पहले पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। फिलहाल, इस मामले की न्यायिक जांच प्रक्रिया चल रही है।

17 जून के एनकाउंटर की सच्चाई पर सवाल

यह विवाद 17 जून को हुई मुठभेड़ के बाद शुरू हुआ। उस दिन भरत तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव आकर एक वीडियो बनाया था। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि भरत तिवारी ने अपनी पिस्तौल फेंक दी है और वह आत्मसमर्पण करने की मुद्रा में हैं। इसके तुरंत बाद, एक पुलिसकर्मी को वह पिस्तौल उठाते हुए देखा गया। इस वीडियो ने पुलिस की कार्यशैली और उनकी बताई गई थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। शुरुआत में पुलिस का दावा था कि एनकाउंटर में तीन गोलियां चलाई गई थीं, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इसे और भी संदेहास्पद बना दिया। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को उनके प्राइवेट पार्ट और छाती पर सटाकर गोली मारी गई थी, जिससे एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

न्यायिक जांच आयोग और राजनीतिक गर्माहट

इस मामले ने जब तूल पकड़ा और सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ा, तो बिहार सरकार ने आनन-फानन में कदम उठाए। सरकार ने एनकाउंटर में संलिप्त पाए गए पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दृष्टि से पूर्व जस्टिस विनोद सिन्हा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। आयोग के प्रमुख रिटायर्ड जस्टिस विनोद सिन्हा ने स्वयं मौके का मुआयना करने और गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए बिलौटी गांव का दौरा किया था। वर्तमान में यह मामला बिहार की राजनीति में भी पूरी तरह छाया हुआ है और इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बिलौटी गांव में अभी भी भारी संख्या में मीडियाकर्मियों और यूट्यूबर्स का जमावड़ा लगा हुआ है जो पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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