धर्म
2 घंटे पहले
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विचारों
भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करने के साथ ही दान-पुण्य और पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्यों में संलग्न होते हैं। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर मंत्र जाप और ध्यान करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को गहरी शांति मिलती है।
पूजा और अनुष्ठान की परंपरा
शास्त्रों के मुताबिक भाद्रपद पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए धार्मिक कार्य साधक के लिए अत्यंत फलदायी होते हैं। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान की आराधना करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन किया गया दान और पूजा व्यक्ति के समस्त कष्टों को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। पूर्णिमा की यह तिथि चंद्र देव की उपासना के लिए भी अत्यंत शुभ मानी गई है।
तिथि को लेकर स्थिति
भाद्रपद पूर्णिमा की सटीक तिथि को लेकर भक्तों में अक्सर संशय की स्थिति बनी रहती है। उज्जैन के आचार्यों के अनुसार, पंचांग की गणना के आधार पर ही व्रत और त्योहारों का निर्णय लिया जाता है। 2026 में भाद्रपद पूर्णिमा की सही तिथि 25 सितंबर और 26 सितंबर के संदर्भ में गणनाओं पर आधारित है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और विद्वानों के परामर्श के अनुसार तिथि का निर्धारण कर सकते हैं ताकि वे अपनी पूजा-अर्चना शुभ मुहूर्त में पूरी कर सकें।
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