गाजा युद्ध: डोनाल्ड ट्रंप की शांति कोशिशों को नेतन्याहू का बड़ा झटका, बोले- हथियार डाले बिना नहीं हटेगी सेना विश्व 2 घंटे पहले 2
गाजा में युद्धविराम और शांति बहाली को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ठुकरा दिया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हमास के पूरी तरह से हथियार डालने से पहले इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी।

गाजा में शांति की कोशिशों के बीच नया गतिरोध

गाजा में चल रही जंग को खत्म करने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया कूटनीतिक कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप के रुख से असहमति जताते हुए साफ कर दिया है कि जब तक हमास अपने हथियार पूरी तरह नहीं डाल देता, तब तक इजरायल गाजा से अपनी सेना वापस नहीं बुलाएगा। नेतन्याहू के इस सख्त बयान ने हमास के हथियार समर्पण से जुड़ी उस डील पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे युद्ध विराम के लिए एक बड़ी उम्मीद माना जा रहा था। इस घटनाक्रम ने अमेरिकी प्रशासन और नेतन्याहू सरकार के बीच बढ़ते मतभेदों को भी जगजाहिर कर दिया है।

इजरायली सेना की वापसी पर पेंच

इस प्रस्तावित शांति समझौते की रूपरेखा के अनुसार, हमास द्वारा हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होनी थी, जिसके बदले में इजरायल को अपने सैन्य हमलों को रोककर गाजा के उस 60 प्रतिशत हिस्से से पीछे हटना था जिस पर वर्तमान में उनका नियंत्रण है। यह समझौता मुख्य रूप से अक्टूबर महीने में हुई उस सीजफायर डील का विस्तार माना जा रहा था, जिसने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों को विराम दिया था और गाजा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया था। हालांकि, अन्य मोर्चों पर इस प्रक्रिया के आगे न बढ़ पाने के कारण स्थिति अब और अधिक जटिल हो गई है।

नेतन्याहू का दो टूक रुख

बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण ही प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायली सेना अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह कदम उठाती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,

ट्रंप प्रशासन ने हमें एक ड्राफ्ट भेजा था। उससे हम सहमत नहीं थे। वह हमारा ड्राफ्ट नहीं है। हमने अपनी राय भेजी, वही हमारा रुख है।

हमास के फिर से सक्रिय होने का डर

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने भी सरकार के इस स्टैंड का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यदि हमास के हथियार डालने से पहले ही इजरायली सेना गाजा से हटती है, तो हमास को दोबारा संगठित होने का मौका मिल जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में हमास न केवल अपने आतंकी ढांचे को पुनः खड़ा करेगा, बल्कि इजरायली नागरिकों के लिए खतरा बनकर 7 अक्टूबर 2023 जैसी घटनाओं को दोहराने की कोशिश भी कर सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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