बेंगलुरु-मंगलुरु इकोनॉमिक कॉरिडोर EC-34: अब 3 से 4 घंटे में पूरा होगा सफर राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 3
बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित EC-34 इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क यात्रा की सूरत बदलने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के बाद सफर का समय आधा रह जाएगा और औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलेगी।

नए कॉरिडोर से बदलेगा यात्रा का अनुभव

बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच का सफर भविष्य में बेहद सुगम होने वाला है। प्रस्तावित EC-34 इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए इन दोनों शहरों के बीच की दूरी कम समय में तय की जा सकेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड है, जो यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगी।

टनल और बायपास से मिलेगी राहत

यह पूरा कॉरिडोर करीब 335 किलोमीटर लंबा होगा। इस मार्ग की सबसे बड़ी चुनौती शिराडी घाट के कठिन रास्तों को पार करना है। इसे हल करने के लिए सरकार ने टनल यानी सुरंगों और वायडक्ट का निर्माण करने की योजना बनाई है। इससे उन इलाकों को बायपास करना आसान होगा जहां ट्रैफिक और भौगोलिक बाधाएं अधिक हैं। वर्तमान में इस सफर को पूरा करने में 6 से 8 घंटे का समय लगता है, लेकिन नए कॉरिडोर के तैयार हो जाने के बाद यह समय घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रहने की उम्मीद है।

व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस कॉरिडोर का सीधा और सबसे बड़ा लाभ न्यू मंगलुरु पोर्ट को मिलने वाला है। बेंगलुरु के औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार होने वाला माल अब बिना किसी देरी के सीधे बंदरगाह तक पहुंच सकेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इस परियोजना से इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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