भारत
2 महीने पहले
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आईटी कंपनी के कैंपस में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
बेंगलुरु के पूर्वी हिस्से में स्थित ब्रुकफील्ड में एक बड़ी आईटी कंपनी कैपजेमिनी के एचएएल कैंपस में संचालित डे-केयर सेंटर इस समय विवादों के घेरे में है। यहां पर छोटे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त ५ महिलाओं के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब २ से ३ साल के मासूमों के साथ दुर्व्यवहार के वीडियो सामने आए और इसकी जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंची।
माता-पिता की अनुपस्थिति में यातनाओं का दौर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब अभिभावक अपने दफ्तर के कामों में व्यस्त रहते थे, तब डे-केयर के भीतर बच्चे अमानवीय यातनाएं झेल रहे थे। यह पूरा मामला तब खुला जब बच्चों के रोने और शारीरिक शोषण से जुड़े फुटेज किसी ने शिकायतकर्ता के साथ व्हाट्सऐप पर साझा किए। इन साक्ष्यों के आधार पर एचएएल पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास भी इस मामले की औपचारिक शिकायत पहुंचाई गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है।
आरोपी महिलाओं की पहचान और क्रूरता का तरीका
इस मामले में पुलिस ने जिन ५ महिलाओं को आरोपी बनाया है, उनकी पहचान मंजुला, विजयलक्ष्मी, सिंधु, भवानी और बिंदु के रूप में हुई है। ये सभी महिलाएं उसी डे-केयर सेंटर में बतौर कर्मचारी कार्यरत थीं। वीडियो फुटेज में इन महिलाओं की जो करतूतें नजर आई हैं, वे बेहद विचलित करने वाली हैं। आरोप है कि ये महिलाएं:
- बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल देती थीं।
- बच्चों को वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट कमोड पर बैठने के लिए मजबूर करती थीं।
- टॉयलेट जेट स्प्रे के पानी से मासूमों के मुंह पर बौछार मारती थीं।
- रोने या शोर मचाने पर उन्हें बाथरूम में बंद कर देती थीं और डरा-धमका कर शांत कराती थीं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मंगलवार को सभी ५ आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर ये वीडियो कब के हैं और यह क्रूरता कितने समय से चल रही थी। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं और भी बच्चे इस तरह के दुर्व्यवहार का शिकार तो नहीं हुए हैं। इस घटना ने कामकाजी माता-पिता के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि मल्टीनेशनल कंपनियों के कैंपस के भीतर बने डे-केयर सेंटर्स में बच्चों को सुरक्षित छोड़ना कितना सही है।
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