बलिया के इस चमत्कारी कुंड में स्नान करने से दूर होते हैं जिद्दी चर्म रोग, जानिए सैकड़ों साल पुराना इतिहास और धार्मिक महत्व धर्म 3 घंटे पहले 3
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित एक प्राचीन कुंड अपने चमत्कारी जल और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां स्नान करने से त्वचा की गंभीर बीमारियां ठीक होने का दावा किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जो अपनी अनूठी विशेषताओं और लोक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने रहते हैं। इसी कड़ी में बलिया जिले का बांसडीह क्षेत्र इन दिनों अपनी एक बेहद प्राचीन और रहस्यमयी परंपरा के लिए चर्चा में है। बांसडीह बकवा के पतीसा गांव में स्थित एक सैकड़ों साल पुराना कुंड और उससे सटा शिव मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा का ठिकाना बना हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र कुंड के जल में ऐसा दिव्य प्रभाव है कि इसमें स्नान करने मात्र से त्वचा से संबंधित हर प्रकार के जिद्दी रोग दूर हो जाते हैं।

जिद्दी चर्म रोगों से मुक्ति की अटूट जनमान्यता

स्थानीय परंपरा और सदियों से चली आ रही मान्यताओं के मुताबिक, इस पवित्र स्थल पर बने कुंड का पानी साधारण जल नहीं माना जाता। चर्म रोग से पीड़ित लोग दूर-दूर से अपनी शारीरिक व्याधियों से मुक्ति पाने की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। इस कुंड में स्नान करने के लिए कोई विशेष तिथि या दिन तय नहीं किया गया है। मान्यता है कि श्रद्धालु सुबह के वक्त किसी भी दिन आकर इस जल में स्नान कर सकते हैं। हालांकि, त्वचा के गंभीर और पुराने रोगों से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस पानी में लगातार 1 से 2 महीने तक प्रतिदिन सुबह स्नान करने का नियम बताया गया है। कई लोगों का दावा है कि इस जल से लगातार स्नान करने के बाद उन्हें त्वचा की पुरानी बीमारियों से हमेशा के लिए आराम मिल गया है।

पवित्र जल का संगम और कुंड के मध्य जलमग्न शिव प्रतिमा

इस ऐतिहासिक कुंड की सबसे बड़ी खासियत इसके जल का आध्यात्मिक संयोजन और इसकी अद्भुत बनावट है। बलिया जिले के बांसडीह बकवा स्थित पतीसा गांव के निवासी अखिलानंद पांडेय ने इस स्थान के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कुंड बेहद प्राचीन है और लोगों के जन्मकाल से भी पुराना है। उन्होंने बताया कि इस कूप में सात समुद्रों का जल छोड़ा गया है। इसके अलावा देश भर के कई अन्य बड़े और प्रसिद्ध पवित्र तीर्थों के पावन जल का सम्मिश्रण भी इसमें किए जाने की बात कही जाती है।

इस कुंड की एक और बहुत ही अद्भुत विशेषता यह है कि इसके बिल्कुल मध्य भाग में भगवान शिव की एक प्राचीन प्रतिमा स्थापित की गई है। कुंड में पानी का स्तर ऐसा रहता है कि भगवान शंकर की यह पवित्र मूर्ति हर समय आधी जल में डूबी रहती है। स्थान की पावनता को बनाए रखने के लिए यहां पूर्व में पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। कुंड के ठीक पास में ही एक विशाल प्राचीन शिव मंदिर भी मौजूद है, जहां श्रद्धालु स्नान के बाद पूजा-अर्चना करते हैं।

चित्रकूट के भरत कूप और श्रीराम राज्याभिषेक का पौराणिक संदर्भ

इस कुंड की तुलना और संबंध चित्रकूट के प्रख्यात भरत कूप कुंड से भी जोड़ा जाता है। स्वामी ओम संत महाराज के अनुसार, चित्रकूट में स्थित भरत कूप का एक बेहद खास पौराणिक महत्व है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां की जा रही थीं, तब देश भर के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों का पावन जल एवं सामग्रियां एकत्र की गई थीं। राज्याभिषेक के उपरांत उस पावन जल को चित्रकूट के उसी कूप में प्रवाहित कर दिया गया था, जिसके बाद से उस कूप का आध्यात्मिक प्रभाव अमर हो गया। इसी तर्ज पर बलिया के इस कुंड में भी विभिन्न तीर्थों के जल समाहित होने के कारण इसकी धार्मिक मान्यता कई गुना बढ़ जाती है।

बिहार और अन्य पड़ोसी राज्यों से उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

इस कुंड की चमत्कारी प्रसिद्धि केवल बलिया जिला या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार तथा देश के अन्य कई दूर-दराज के प्रदेशों से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पुरानी पीढ़ी से लेकर वर्तमान समय तक इस कुंड के चमत्कारों की कहानियां सत्य साबित होती आई हैं। यही वजह है कि आज भी यह प्राचीन स्थल आस्था, कौतुहल और आध्यात्मिक खोज का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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