उत्तर प्रदेश: पिता की मौत का सदमा नहीं सह पाया 15 साल का बेटा, पिता-पुत्र दोनों की गई जान उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 84
बस्ती जिले के एक गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पिता की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनके 15 वर्षीय बेटे ने भी दम तोड़ दिया। एक साथ दो अर्थियां उठने से पूरे इलाके में मातम पसर गया है।

बस्ती जिले में दुखों का पहाड़

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मुंडेरवा थाना क्षेत्र के परसा हज्जाम गांव में एक परिवार पर अचानक दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि घर में खुशियों की जगह सन्नाटा पसर गया। एक पिता की असमय मृत्यु के बाद उनके 15 वर्षीय किशोर बेटे ने भी सदमे के चलते अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना से हर कोई स्तब्ध है और पूरे गांव में मातम का माहौल है।

पिता की तबीयत बिगड़ने से शुरू हुआ सिलसिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 50 वर्षीय ज्योति प्रकाश अपने नए घर के निर्माण कार्य में जुटे थे। रविवार का दिन उनके परिवार के लिए सपनों का दिन था, क्योंकि वे अपने नए मकान की नींव भराई का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्हें शरीर में काफी कमजोरी महसूस होने लगी और माथे पर तेज पसीना आने लगा। परिजन आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बेटे का सदमा और अंतिम समय

जैसे ही परिवार के लोग ज्योति प्रकाश का शव लेकर वापस गांव पहुंचे, वहां मौजूद उनका 15 वर्षीय बेटा राज अपने पिता की देह को देखते ही बुरी तरह टूट गया। पिता की मौत का गहरा सदमा किशोर के दिलो-दिमाग पर इस कदर हावी हुआ कि वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। बदहवास परिजन उसे तुरंत आनन-फानन में जिला अस्पताल ले गए। हालांकि, डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद, दोपहर करीब 12 बजे किशोर ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

चिकित्सकों और स्थानीय प्रशासन का पक्ष

चिकित्सकों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर किशोर की मृत्यु का कारण अत्यधिक सदमा ही प्रतीत हो रहा है। पिता और पुत्र की एक साथ हुई मृत्यु से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुखद घड़ी में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव का हर निवासी गमगीन है।

स्थानीय ग्राम प्रधान रजवंत यादव ने बताया कि दिवंगत ज्योति प्रकाश का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके संघर्षों को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर था। जिस मकान के निर्माण के लिए उन्हें आवास आवंटित हुआ था, उसी की नींव भरते समय यह अनहोनी घटी।

अधूरे सपनों के साथ उठी अर्थी

जिस घर में नए आशियाने का सपना बुना जा रहा था, उसी घर से कुछ ही घंटों के अंतराल में पिता और बेटे की अर्थियां एक साथ उठीं। यह दृश्य इतना भावुक करने वाला था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। परिवार का भविष्य संवारने का सपना लिए जो पिता मेहनत कर रहा था, उसी मेहनत के दौरान हुई घटना ने पिता के साथ-साथ बेटे की भी जान ले ली। यह दुखद घटना पीछे केवल आंसू, गहरा सन्नाटा और बिखरे हुए अधूरे सपनों को छोड़ गई है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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