बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति बने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, कभी भारत में लेनी पड़ी थी पनाह विश्व एक घंटा पहले 5
बांग्लादेश ने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अपना नया राष्ट्रपति चुन लिया है। एक छात्र नेता से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले आलमगीर के जीवन में एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी थी।

बांग्लादेश की नई राजनीतिक इबारत

बांग्लादेश की संसद ने गुरुवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लंबे समय से महासचिव रहे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति नियुक्त किया है। 1960 के दशक में एक वामपंथी छात्र कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले मिर्जा फखरुल अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजमान हो गए हैं। हालांकि, उनका यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी था जब विपरीत परिस्थितियों में उन्हें भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

मंत्री पद से राष्ट्रपति तक

राष्ट्रपति बनने से पहले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार में ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। इसके साथ ही वे बीएनपी के महासचिव के तौर पर पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर रहे थे।

पाकिस्तानी शासन का विरोध और छात्र राजनीति

मिर्जा फखरुल के राजनीतिक जीवन की शुरुआत ढाका विश्वविद्यालय से हुई। उस समय वे वामपंथी संगठन 'ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन' से जुड़े थे। वर्ष 1969 में उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य समर्थित सरकार के खिलाफ हुए व्यापक जन आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और ढाका विश्वविद्यालय में अपनी पार्टी की यूनिट के अध्यक्ष के पद पर कार्य किया।

भारत में शरण और मुक्ति संग्राम में भूमिका

वर्ष 1971 में जब बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम चल रहा था, तब एक चुनौतीपूर्ण समय आया जब मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को भारत में शरण लेनी पड़ी। इस दौरान उन्होंने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों को एकजुट करने और उन्हें संगठित करने में एक बड़ी भूमिका अदा की थी।

सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति का रुख

मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व वे एक सरकारी कर्मचारी थे। वर्ष 1972 में वे सिविल सर्विस के एजुकेशन कैडर में शामिल हुए और अर्थशास्त्र के शिक्षक के रूप में अपनी सेवा दी। लेकिन जनसेवा के अपने जुनून के चलते उन्होंने वर्ष 1986 में अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

नगर पालिका से शीर्ष पद तक का सफर

वर्ष 1988 में उनकी मेहनत रंग लाई और वे अपने गृह क्षेत्र ठाकुरगांव से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद 1990 के दशक की शुरुआत में वे बीएनपी में शामिल हो गए। वर्ष 2001 में वे पहली बार सांसद निर्वाचित हुए और सरकार में कृषि राज्य मंत्री तथा नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री की अहम जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा, फरवरी 2026 के आम चुनाव में भी मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ठाकुरगांव-1 सीट से फिर से जीत दर्ज करने में सफल रहे थे।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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