कान्हा की जीवनरेखा बंजर नदी: 150 KM का सफर तय कर मां नर्मदा की गोद में मिलती, जानिए इसकी कहानी मध्य प्रदेश 3 घंटे पहले 14
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले से निकलने वाली बंजर नदी कान्हा नेशनल पार्क की जीवनदायिनी मानी जाती है और लंबा सफर तय कर नर्मदा की प्रमुख सहायक नदी के रूप में उसमें समा जाती है। यह नदी जैव विविधता के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला प्रकृति संरक्षण की एक मिसाल है, जहां नदियों, जंगलों, पहाड़ों और समूची प्रकृति को सदियों से संजोकर रखा गया है। यही वजह है कि पूरे मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा वन और जैव विविधता बालाघाट में बची हुई है। इस विविधता को बनाए रखने में यहां का अपवाह तंत्र अहम भूमिका निभाता है। जिले को सिंचित रखने वाली कई छोटी-बड़ी नदियों में से एक है बंजर नदी, जो कान्हा नेशनल पार्क से होकर बहती है।

यह नदी छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बंजारपुर से निकलती है और 155 किलोमीटर का सफर तय कर मंडला जिले में नर्मदा की प्रमुख जलधारा के रूप में समा जाती है। बंजर नदी न सिर्फ जैव विविधता बल्कि सामाजिक और धार्मिक नजरिए से भी खासी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

छत्तीसगढ़ से निकलकर एमपी में बहती है यह नदी

कान्हा नेशनल पार्क की जीवनदायिनी कही जाने वाली बंजर नदी छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बंजारी टोला गांव से निकलती है। यहां एक छोटी-सी धारा है, जिससे साल भर पानी निकलता रहता है और यह एक कुंड का निर्माण करती है।

गर्मियां आते ही यह धारा सूख जाती है और फिर धीरे-धीरे नदी अपने स्वरूप में लौट आती है। शुरुआत में यह किसी नाले जैसी दिखाई देती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, विशाल रूप धारण कर लेती है। इससे पहले यह कई किलोमीटर तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा रेखा भी बनाती है।

कान्हा नेशनल पार्क के लिए क्यों है जरूरी

बंजर नदी कान्हा नेशनल पार्क के बीचों-बीच से होकर बहती है और साल भर वन्य प्राणियों की प्यास बुझाती है। नदी के किनारे कई गांव भी बसे हुए हैं, जिनके जीवन के लिए यह बेहद अहम है।

कान्हा नेशनल पार्क में मुख्य रूप से दो नदियां हैं—एक बंजर और दूसरी हालोन। ये दोनों नदियां अपने दोनों किनारों पर घाटियों यानी वैली का निर्माण करती हैं।

नर्मदा को सबसे ज्यादा पानी देने वाली नदी

बंजर नदी के उद्गम स्थल पर मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल पहुंचे और छत्तीसगढ़ के बंजार टोला स्थित उद्गम कुंड में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कुंड की परिक्रमा करते हुए बंजर नदी को नर्मदा की महत्वपूर्ण जलधारा बताया और इसके संरक्षण तथा उद्गम स्थलों के पुनर्जीवन पर जोर दिया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि बंजर नदी नर्मदा को सबसे अधिक जल देने वाली प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।

क्या है इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता

बंजार टोला में पदस्थ प्रधान पाठक प्रीतम सिंह मेरावी ने बताया कि यह नदी आदिवासियों की आस्था का प्रतीक है। यहां के बंजारपुर, खादी, दर्दीघाट और खर्रा-धार में बड़े मेले आयोजित होते हैं।

एक मान्यता यह भी है कि इस नदी के उद्गम कुंड में स्नान करने से मां बनने की इच्छा रखने वाली महिलाओं की मनोकामना पूरी होती है।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!