उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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बुलडोजर की कार्रवाई पर लगी रोक
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर छाए ध्वस्तीकरण के संकट के बीच प्रबंधन को एक बड़ी राहत मिली है। मुरादाबाद के मंडलायुक्त ने रामपुर के जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का निर्देश दिया गया था। विश्वविद्यालय की ओर से दायर की गई अपील के बाद जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे पहले, इन अवैध निर्माणों को गिराने के आदेश के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र कैंपस के बाहर एकत्रित हुए थे और उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन भी दर्ज कराया था।
आजम खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का एक ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। इस संस्थान की नींव साल 2006 में रखी गई थी, जब वे उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री पद पर कार्यरत थे। हालांकि, 18 सितंबर 2006 को स्थापना के तुरंत बाद प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई, जिसके चलते इस विश्वविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन लंबे समय तक अधर में लटका रहा।
लंबे इंतजार के बाद हुआ उद्घाटन
इस यूनिवर्सिटी का सफर संघर्षों से भरा रहा। स्थापना के करीब 6 साल बाद, वर्ष 2012 में जब उत्तर प्रदेश में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तब जाकर आजम खान के इस सपने को उड़ान मिली। 18 सितंबर 2012 को इसका उद्घाटन किया गया। निर्माण कार्यों के दौरान सामने आया कि जिस समय यूनिवर्सिटी का ढांचा तैयार किया जा रहा था, उस समय रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ था। उस समय क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन आता था। रिकॉर्ड के अनुसार, केवल दो भवनों के लिए ही जिला पंचायत से अनुमति ली गई थी, जबकि बाद में बनाई गई 38 इमारतों के लिए कोई वैध मंजूरी नहीं ली गई थी।
ध्वस्तीकरण का आधार और कानूनी स्थिति
रामपुर विकास प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) के तहत इन 38 भवनों को अवैध घोषित किया था। दस्तावेजों की गहन जांच और सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने इन्हें गिराने का फरमान सुनाया था। इससे पहले साल 2021 में भी यह यूनिवर्सिटी कानूनी मुश्किलों में फंसी थी, जब राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय की 70 हेक्टेयर से अधिक जमीन वापस अपने नियंत्रण में ले ली थी। उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह जमीन सरकारी कब्जे में आ गई थी। वर्तमान में कमिश्नर के दखल ने इस मामले को नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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