ज्योतिष
एक महीने पहले
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विचारों
पितृ दोष और संतान प्राप्ति का संकट
आज के दौर में कई दंपत्ति संतान सुख पाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें निराशा का सामना करना पड़ता है। देहरादून के जाने-माने ज्योतिषाचार्य संजय के अनुसार, इस समस्या के पीछे कई बार पितृ दोष एक बड़ा कारण होता है। पितृ दोष किसी व्यक्ति के जीवन से संतान प्राप्ति का सुख पूरी तरह छीन सकता है, जिससे परिवार में तनाव और मायूसी का माहौल बना रहता है।
कुंडली में योग और लक्षण
ज्योतिषाचार्य स्पष्ट करते हैं कि जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि एक ही भाव में स्थित होते हैं, तो वह जातक पितृ दोष से प्रभावित माना जाता है। इस दोष के दुष्प्रभाव केवल संतान न होने तक ही सीमित नहीं रहते। यदि पितृ दोष के कारण संतान हो भी जाए, तो वे अक्सर कुसंस्कारी होते हैं और माता-पिता की आज्ञा का पालन नहीं करते, जिससे जीवन में दुखों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
मुक्ति के सरल उपाय
पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, अमावस्या का दिन पितृ शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इस दिन पवित्र गंगा स्नान करना दोष को दूर करने में अत्यंत सहायक माना गया है। भले ही आपके पितृ अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन यदि उन पर सूर्य का श्राप है, तो उसकी भरपाई उनके वंशजों को ही करनी पड़ती है। अमावस्या पर किए गए विशेष अनुष्ठान और दान पुण्य से पितरों को तृप्ति मिलती है और दोष का प्रभाव कम होने लगता है।
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