ज्योतिष
एक दिन पहले
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विचारों
घर की सजावट और वास्तु का संबंध
आजकल घरों में शीशों का उपयोग केवल अपना चेहरा देखने के लिए ही नहीं, बल्कि घर की सजावट को निखारने के लिए भी किया जा रहा है। छोटे कमरों को विशाल दिखाने और आधुनिक लुक देने के लिए दीवारों पर बड़े-बड़े मिरर लगाने का चलन काफी बढ़ गया है। लेकिन वास्तु शास्त्र की दृष्टि से शीशा महज एक इंटीरियर डिजाइन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे घर में ऊर्जा के प्रवाह को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
कितने शीशे होना है शुभ
अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, किसी भी घर के लिए दो शीशे पर्याप्त माने गए हैं। यदि आप इससे ज्यादा शीशे लगाते हैं, तो यह वास्तु के नियमों के विरुद्ध हो सकता है। इन दो शीशों को सही दिशा में लगाना बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें से एक शीशा पूर्व दिशा की दीवार पर और दूसरा उत्तर दिशा की दीवार पर लगा होना चाहिए। वास्तु में पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है, जबकि उत्तर दिशा को सुख-समृद्धि के लिए उत्तम माना जाता है।
गलत दिशा और अधिक शीशों के नुकसान
अगर आप इन दिशाओं के अलावा अन्य जगहों पर बहुत सारे शीशे लगा देते हैं और वे एक-दूसरे का प्रतिबिंब बनाने लगते हैं, तो घर में रहने वाले सदस्यों के मन में भारी बेचैनी और मानसिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसके अलावा, बाथरूम में शीशों का चुनाव बहुत सावधानी से करना चाहिए। बाथरूम में नकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है, इसलिए वहां दो या उससे अधिक शीशे लगाने से बचें, क्योंकि यह नकारात्मकता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। वास्तु का पालन करने से घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है।
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